बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि कोई भी पद समाप्त नहीं होगा। कोई भी स्कूल बंद नहीं होगा। कोई भी शिक्षक नहीं हटेगा। जो विद्यालय खाली हो रहे हैं, वहां पर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के साथ मिलकर बाल वाटिका चलाई जाएगी। यहां पर 3 से 4 साल, 4 से 5 साल और 5 से 6 साल वाले बच्चों की अलग-अलग पढ़ाई होगी। इनके लिए टेक्सट बुक तैयार करा दी गई हैं। वंडर बॉक्स, बिग बुक आदि का भी प्रयोग करेंगे। इनके लिए 19000 ईसीसीई एजुकेटर की भर्ती चल रही है।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि विलय के बाद 50 छात्र संख्या वाले विद्यालय में दो शिक्षक, एक शिक्षामित्र यानी कुल तीन शिक्षकों की तैनाती होगी। इतना ही नहीं प्राइमरी में 30 छात्र पर एक शिक्षक, अपर प्राइमरी में 35 छात्र पर एक शिक्षक होना चाहिए। अगर विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात सही नहीं है तो नई भर्ती भी करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी स्कूल में शिक्षक, अच्छे संसाधन व बेहतर व्यवस्था की कोई कमी नहीं होगी। आने वाले समय में विद्यालयों के विलय के भी बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
संदीप सिंह ने स्कूल विलय मामले में विपक्ष हो भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था स्ट्रेचर पर थी। स्कूलों में संसाधन नहीं थे, शिक्षक नहीं थे, भवन जर्जर थे। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरते थे। ऐसे लोगों को वर्तमान की व्यवस्था की चिंता करने और लोगों को दिग्भ्रमित करने की जरूरत नहीं है। स्कूलों का विलय छात्रहित व प्रदेश हित में है। वर्तमान सत्र में भी परिषदीय विद्यालयों में 2753394 लाख नए बच्चों का नामांकन हुआ है।