हाईकोर्ट के आदेश के बाद यूपी सरकार ने मेडिकल पीजी में दाखिले के लिए हुई काउंसलिंग निरस्त कर दी है। अब नए सिरे से मेडिकल पीजी कक्षाओं में दाखिले के लिए मेरिट लिस्ट जारी कर काउंलिंग की जाएगी। काउंसलिंग कराने के लिए प्रदेश सरकार हाईकोर्ट से समय मांगेगी।
हाईकोर्ट ने सोमवार को मेडिकल पीजी कक्षाओं में नए सिरे से काउंसलिंग कराकर प्रवेश सूची जारी करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने पहले कराई गई काउंसलिंग में अनियमितता की शिकायतों को सही पाने के बाद प्रदेश सरकार के सभी शासनादेश निरस्त कर दिए थे।
इसी मामले में मंगलवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने काउंसलिंग निरस्त कर नए सिरे से काउंसलिंग कराने का निर्णय लिया। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. अनिता भटनागर जैन ने कहा कि हाईकोर्ट ने दूसरे प्रदेशों से एमबीबीएस करने वाले प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएचएमएस) संवर्ग में कार्यरत डॉक्टरों को पीजी में कोटा देने से इन्कार कर दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि दूसरे प्रदेशों से एमबीबीएस करने वाले पीएमएस डॉक्टर पीजी में दाखिला पाने के लिए अर्हता नहीं रखते हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट ने एएमयू व बनारस हिंदू विवि में अपने एमबीबीएस छात्रों के लिए 50 फीसदी कोटे को भी निरस्त कर दिया है।
पीएचएमएस डॉक्टरों के दाखिले होंगे निरस्त
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उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों, विवि व संस्थानों की ही तरह एएमयू व बीएचयू में भी दाखिले देने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने 29 मई के आदेश में कहा है कि सरकार नए सिरे से मेरिट बनाकर 31 मई तक दाखिला दे दे।
लेकिन यह संभव नहीं है, इसलिए सरकार काउंसलिंग के लिए और समय मांगेगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद यूपी सरकार ने पीजी की बची हुई सीटों के लिए 31 मई को होने वाले मॉप-अप राउंड को स्थगित कर दिया है।
यह काउंसलिंग लखनऊ एसजीपीजीआई में होनी थी। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि काउंसिलंग की सूचना वेबसाइट (http://upneet.gov.in) ß (www.updgme.in) उपलब्ध कराई जाएगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मेडिकल पीजी में प्रवेश पाने वाले 53 पीएचएमएस डॉक्टरों के दाखिले निरस्त होंगे। ये वे डॉक्टर हैं, जिन्होंने दूसरे प्रदेशों से एमबीबीएस करने के बाद सूबे के स्वास्थ्य विभाग में नौकरी कर ली है।
पीएचएमएस डॉक्टरों को फीस होगी वापस
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यूपी सरकार ग्रामीण व दुर्गम इलाकों में काम करने वाले पीएचएमएस सेवा के डॉक्टरों को पीजी कोर्स के दाखिले में वेटेज देती है। स्टेट कोटे के तहत एडमिशन सूबे से एमबीबीएस करने वालों को ही मिलता है।
लेकिन इस बार दूसरे प्रदेशों से एमबीबीएस करने वाले पीएचएमएस डॉक्टरों को भी दाखिला दे दिया गया था। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि पीएचएमएस संवर्ग के डॉक्टरों, जिनके एडमिशन हो गए थे, उनकी फीस वापस होगी।
पंजीकरण के समय डॉक्टरों ने जो बैंक खाते का विवरण दिया था, उसमें यह फीस वापस होगी। जिनका नंबर दोबारा काउंसलिंग में आएगा, उनकी जमा की गई फीस का समायोजन नए एडमिशन के समय होगा।