मौके पर नहीं मिला पूरा सामान
हजरतगंज पुलिस ने ताला खुलवाया, लेकिन मौके पर पूरा सामान नहीं मिला। जबकि मैदान में पहले दिन पंखे अलमारी, विद्यालय से जुड़े दस्तावेज पड़े हुए थे। आशंका है कि विद्यालय के दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई है।
दबंगों ने तोड़ा फर्नीचर, बोर्ड उखाड़ा
गेट खुलने के बाद अंदर फर्नीचर टूटा हुआ मिला है। वहीं विद्यालय का बोर्ड भी गायब है। प्रबधंक ने इस संबंध में पुलिस से जानकारी मांगी पुलिस कुछ जवाब नहीं दे सकी है।
एडीएम को आना पड़ा बैकफुट पर
अमर उजाला की ओर से प्रमुखता से मुद्दे को उठाए जाने के बाद इस मामले में एडीएम पूर्वी का बीते 21 अप्रैल का अपना ही आदेश पलटना पड़ा। इसके बाद हजरतगंज पुलिस को वापस विद्यालय प्रबंधक को कब्जा दिलाए जाने का आदेश दिया गया।
एडीएम के आदेश के बाद भी पुलिस की लापरवाही
एडीएम के आदेश के बाद भी हजरतगंज पुलिस की लापरवाही दिखी। दो पहले एडीएम ने प्रबंधक को कब्जा दिलाने का आदेश हजरतगंज पुलिस को दिया था, लेकिन पुलिस बुधवार की दोपहर तक हीलाहवाली करती रही। हजरतगंज थाना प्रभारी विक्रम सिंह प्रक्रिया का ही हवाला देते रहे।
कब्जा होने के बाद प्रदर्शन करती बच्चियां और टीचर, अभिभावक।- फाइल फोटो।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
8 जून को जारी आदेश में एडीएम ने कहा
8 जून को अपर जिला अधिकारी नगर पूर्वी की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से प्रस्तुत प्रार्थनापत्र को देखने के बाद न्यायालय की ओर से वाद संख्या डी-202510460002316 धारा 36 (2) नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम के तहत पारित आदेश 21 अप्रैल 2026 स्थगित किया जाता है।
एडीएम के आदेश में कहा गया कि यदि कब्जा हस्तगत करा दिया गया है तो पूर्व की भांति विद्यालय प्रबंधन को तत्काल कब्जा दिलाकर न्यायालय को पूरी रिपोर्ट दें। आदेश में ये भी कहा कि तत्काल कब्जा इसलिए दिलाया जाए ताकि छात्राओं की पढ़ाई न प्रभावित हो।
पुलिस सहायता नही मिलने की वजह से नही खुल पाया विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल।
- फोटो : amar ujala
बंद नहीं हो सकता है विद्यालय
इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों कहना है कि जिस भवन में विद्यालय चल रहा है उसी भवन पर मान्यता दी गई है। शिक्षकों को वेतन भी सरकार दे रही है। ऐसे में विद्यालय बिना निदेशक की अनुमति के नहीं बंद किया जा सकता है।
इस संबंध में उत्तर प्रदेश शैक्षिक संस्थायें अधिनियम 1974 कहता है कि प्रत्येक संस्था की शुरुआत होने के दिन से संस्था निदेशक के अधीन हो जाती है। उसके बाद तभी कुछ हो सकता है जबतक निदेशक की अनुमति न हो।
प्रबंधक ने अमर उजाला को दिया धन्यवाद
विद्यालय का ताला खुलते ही प्रबंधक संतोष रस्तोगी ने अमर उजाला को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यदि अमर उजाला हमारे साथ नहीं खड़ा होता तो विद्यालय हाथ से जा चुका था। अब हम विद्यालय को पहले और बेहतर बनाएंगे। विद्यालय किसी भी दशा में बंद नहीं होने देंगे।