बोर्ड के संचालन को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। बोर्ड का कार्यकाल 28 अप्रैल 2025 को खत्म हो गया था। कार्यकाल बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई। हाईकोर्ट ने चार सप्ताह का कार्यकाल बढ़ाने का आदेश दिया। छह मार्च को आईएएस चैत्रा वी को प्रशासक बनाया गया। 20 मई को कोर्ट ने यह नियुक्ति रद्द कर दी। फिर 10 अगस्त को नए सिरे से कंट्रोलर की नियुक्ति की गई है। बोर्ड के विवाद के बीच ही फर्जी पंजीयन का मामला सामने आया है। हालांकि अब नए सिरे से बोर्ड का चुनाव कराने की तैयारी भी है।
रजिस्ट्रार को हटाने की मांग
बोर्ड के उपाध्यक्ष डा. शैलेश कुमार राय ने सोमवार को आयुष विभाग के प्रमुख सचिव रंजन कुमार को पत्र भेजा है। इसमें मांग की है कि पंजीयन फर्जीवाड़े मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके लिए रजिस्ट्रार डा. अखिलेश कुमार वर्मा, कर्मचारी प्रवीण कुमार प्रजापति, प्रवीण, रमाकंत, डा. नरेंद्र को हटाया जाए। उन्होंने तर्क दिया है कि पूरा घटनाक्रम इन्हीं के कार्यकाल है। ऐसे में इनके हटाए बिना निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि पदोन्नति के बाद भी डा. अखिलेश वर्मा रजिस्ट्रार के पद पर बने हुए हैं, यह नियम विरुद्ध है।
इनका निरस्त हुआ है पंजीयन
फर्जीवाड़े के आरोप में जिनका पंजीयन निरस्त हुआ है, उसमें लखनऊ के डा. विजय बहादुर सिंह, सीतापुर के डा. मुजीर्बुरहमान, अयोध्या के डा. सुनील कुमार, रायबरेली के डा. आशीष यादव, सुल्तानपुर के डा. पंकज कुमार सहित 41 लोग शामिल हैं।
सोमवार को दर्ज नहीं हुई रिपोर्ट
फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे डॉक्टर बनने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए बोर्ड की ओर से शनिवार को ही तहरीर भेज दी गई है। इसके बाद भी सोमवार शाम तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा ने बताया कि अभी तक इस मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।