राजधानी सहित प्रदेशभर के आरटीओ व एआरटीओ कार्यालयों में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े कार्य देख रहे 320 निजी कर्मियों को पहले भ्रष्टाचार और दलाली के आरोप लगाकर हटा दिया गया। बाद में उन्हीं कर्मचारियों की पॉजिटिव रिपोर्ट लगाकर दोबारा तैनाती दे दी गई। इससे अफसरों की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है।
जिन कर्मचारियों को दलाल और भ्रष्ट बताया गया था, वे अचानक ईमानदार कैसे हो गए। उनकी कार्यप्रणाली को संतोषजनक बताते हुए प्रदेशभर में तैनाती कैसे दे दी गई, यह बड़ा सवाल बन गया है। सूत्रों का दावा है कि पूरा मामला साजिशन उठाया गया।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले में कर्मचारियों से मोटी रकम वसूली गई। इसमें मुख्यालय में उच्चस्तर पर तैनात एक महिला व पुरुष अधिकारी सहित कई आरटीओ व एआरटीओ की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों से 3.50 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हुई है।
परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मामले की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय पहुंच चुकी है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी अफसरों से पूछताछ करेंगे कि बिना जांच आरोप कैसे लगाए गए और फिर संतोषजनक रिपोर्ट के आधार पर तैनाती कैसे दी गई। मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच शुरू होने पर मुख्यालय समेत कई आरटीओ अफसरों पर कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।