लोकबंधु अस्पताल परिसर में संचालित वन स्टॉप सेंटर में शुक्रवार तड़के बजे शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। इससे वहां पर हड़कंप मच गया। आग ने सेंटर में लगी फाल सीलिंग में आग पकड़ लिया था। इससे वह धूधू करके जलने लगी। फायर उपकरणों की मदद से कर्मचारियों ने आग पर काबू पाने की कोशिश किया मगर कामयाब नहीं हुए। घटना की सूचना पुलिस कुछ ही देर में पहुंच गई। दमकल की गाड़ी करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। इस दौरान लोकबंधु अस्पताल के कर्मचारियों ने फायर उपकरणों की मदद से आग पर काबू पा लिया था।
अस्पताल परिसर में वन स्टाप सेंटर का संचालन हो रहा है। सुबह करीब साढ़े पांच बजे सेंटर में आग लग गई। इससे वहां पर धुआं भरने से आग की लपटे उठने लगी। घटना के समय शेल्टर होम में एक महिला, दो बालिकाएं तथा चार कर्मचारी मौजूद थे। वन स्टाफ सेंटर प्रभारी अर्चना सिंह ने बताया बृहस्पतिवार रात से ही बिजली बार-बार ट्रिप कर रही थी, जिसकी सूचना उन्होंने बिजली विभाग को दी थी।
लेकिन आग लगने के बाद विद्युत आपूर्ति बंद कराने के लिए जेई सहित अन्य अधिकारियों को कई बार फोन किया गया, लेकिन किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। वही दूसरी तरफ आग लगने की सूचना पर कृष्णानगर पुलिस कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गई, जबकि दमकल की गाड़ी करीब एक घंटे बाद पहुंची। तब तक लोकबंधु अस्पताल के कर्मचारियों ने अपने संसाधनों से आग पर काबू पा लिया था। अस्पताल कर्मचारियों की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया।
घटना की जानकारी मिलते ही एडीएम सिटी महेंद्र पाल सिंह, सीएमओ डॉ. एन.बी. सिंह व लोकबंधु अस्पताल के निदेशक डॉ. मेजर राजीव दीक्षित मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। एहतियात के तौर पर शेल्टर होम में रह रही महिलाओं को गोमतीनगर स्थित महिला शरणालय भेज दिया गया। एडीएम सिटी महेंद्र पाल सिंह ने बताया कि घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। आग पर समय रहते काबू पा लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
आग की घटना से नहीं लिया सबक
14 अप्रैल 2025 को आग लगने की घटना हुई थी। इसमें आईसीयू लेकर वार्ड तक में काफी उपकरण इलाज संबंधी दस्तावेज आदि जलकर खाक हो गए थे। आग अस्पताल के दूसरे तल पर बने वार्ड व आईसीयू क्षेत्र के पास लगी थी। करीब 200 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया था। जबकि एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल में फायर फ्रूफ फाल्स सीलिंग लगाने का काम चला रहा है।
साथ ही अनहोनी की दशा में आग पर पानी की बौछार करने का सिस्टम भी लगाया जा रहा है। एक साल से अधिक का समय गुजर चुका है। अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया है। अधूरा काम होने से अस्पताल में मरीजों की जान जोखिम में है। वहीं आईसीयू का विस्तार भी अभी तक अटका हुआ है। दस बेड पर आईसीयू का संचालन हो रहा है। जिसे बढ़ाकर 30 बेड किया जाना था।