बीमा कंपनी द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईएसीएल) की राबर्ट्सगंज शाखा में बीमा प्रीमियम संग्रह में गड़बड़ी के मामले में सीबीआई ने दो आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपी शाखा प्रबंधक तापस मलिक और श्याम सुंदर पर अज्ञात लोगों की मदद से दिसंबर 2020 से दिसंबर 2021 के दौरान वित्तीय अनियमितताएं करने का आरोप है। इससे एनआईएसीएल को 29.94 लाख रुपये का नुकसान हुआ था।
एफआईआर के मुताबिक शाखा प्रबंधक तापस मल्लिक इस अवधि में जमा होने वाले बीमा प्रीमियम के संग्रह, हिसाब-किताब और जमा करने के जिम्मेदार थे। इंश्योरेंस कंपनी की आंतरिक जांच में प्रीमियम संग्रह में कई गड़बड़ियां पाई गईं। कई प्रीमियम संग्रह अभिलेखों में दर्ज थे, लेकिन उनके बदले रकम जमा नहीं हुई। कुछ चेक लंबे समय तक अपने पास रखे गए और बाद में देरी से जमा हुए या अस्वीकृत हो गए।
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हालांकि, प्रीमियम का भुगतान न होने के बावजूद संबंधित बीमा पॉलिसी जारी कर दी गईं। इससे बीमा कवर जारी रहा, जबकि आवश्यक प्रीमियम प्राप्त नहीं हुआ था। तत्कालीन उप-कर्मचारी श्याम सुंदर ने भी कई प्रीमियम राशि नकद या धनादेश से प्राप्त की थी। उन्होंने यह राशि अपने पास रख ली या एनआईएसीएल के आधिकारिक खाते में जमा नहीं की। इससे उनकी आपराधिक साजिश और पद के दुरुपयोग का खुलासा हो गया।
खातों में हेरफेर: तापस मल्लिक ने बैंक समाधान विवरण तैयार करने में भी अनियमितता की। इससे प्रीमियम संग्रह और बैंक में जमा राशि में अंतर आ गया। यह हेरफेर गतिविधियों को छिपाने के लिए किया गया था। प्रीमियम संग्रह राशि के साथ बेईमानी और अपने पद का दुरुपयोग करने पर दोनों के खिलाफ सीबीआई, लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।