प्रस्ताव में कहा गया है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 131 के अनुसार सरकारी कम्पनी का निजीकरण करने के पहले उसकी परिसम्पत्तियों का सही मूल्यांकन और राजस्व पोटेंशियल का मूल्यांकन किया जाना जरूरी है। संघर्ष समिति ने कहा कि 42 जनपदों की सारी जमीन मात्र 1 रूपये की लीज पर निजी घरानों को दी जा रही है। यह बड़ी लूट है। उप्र पॉवर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन ने निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति को समर्थन देने का ऐलान करते हुए कहा कि निजीकरण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि निजीकरण के जरिए बिजली उपभोक्ताओं को फिर से लालटेन युग में ले जाने की तैयारी है।
रेल कर्मचारियों के राष्ट्रीय नेता शिव गोपाल मिश्र ने कहा कि यदि उप्र में बिजली कर्मचारियों पर निजीकरण थोपा गया तो सारे देश के रेल कर्मचारी, बिजली कर्मचारियों के साथ प्रदेश की जेलों को भर देंगे। संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दर्शन पाल, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इण्डिया के कार्यकारी निदेशक रमानाथ झा, नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉइज एण्ड इंजीनियर्स के संयोजक सुदीप दत्त, ऑल इण्डिया पॉवर डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष आर के त्रिवेदी, ऑल इण्डिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के एके जैन आदि ने संबोधित किया। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों, बैंक कर्मचारियों, राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों के प्रतिनिधियों ने महापंचायत को सम्बोधित किया।
देश के इतिहास में पहली बार बिजली के निजीकरण के विरोध में किसान, मजदूर, गरीब और मध्यमवर्गीय घरेलू उपभोक्ता एक साथ लामबन्द होकर आन्दोलन और सामूहिक जेल भरो अभियान का फैसला लिया है। महापंचायत में प्रस्ताव पारित किया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बिजली सार्वजनिक क्षेत्र में रहना आवश्यक है। निजीकरण के बाद बहुराष्ट्रीय निजी कम्पनियों के आने से देश की बिजली ग्रिड सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
उत्पीड़न हुआ तो शुरू होगा जन आंदोलन
बिजली कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि आंदोलनरत बिजली कर्मियों का उत्पीड़न किया गया तो किसान, मजदूर और उपभोक्ता एकजुट होकर आन्दोलन करेंगे और निजीकरण का निर्णय वापस होने तक आन्दोलन जारी रखेंगे।
वक्ताओं ने कहा निजीकरण के पीछे बड़े भ्रष्टाचार है । अवैध ढंग से नियुक्त किये गये ट्रांजैक्शन एडवाइजर ग्रान्ट थार्नटन के साथ मिली भगत में पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन, निदेशक वित्त और शासन के कुछ आला अधिकारियों ने आर एफ पी डॉक्यूमेंट बनवाकर विद्युत नियामक आयोग को भेजा था। इसे कई आपत्तियां लगाते हुए विद्युत नियामक आयोग ने वापस कर दिया है जो इस बात का सबूत है कि जल्दबाजी में किये जा रहे निजीकरण के पीछे गलत आकडें देकर भ्रष्टाचार की मंशा है। यह भी मांग की है कि कंसलटेंट की नियुक्ति, बढ़ा चढ़ा कर आरएफपी डॉक्यूमेंट में दिखाया गया घाटा और फर्जी आंकड़ा बनाने वाले अधिकारियों की सीबीआई से जांच कराई जाय।
सीबीआई से जांच कराने की मांग
उप्र पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा किए गए स्थानांतरणों पर बिजली कर्मियों ने आक्रोश व्यक्त किया। मुख्यमंत्री से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में हुए बड़े पैमाने पर स्थानांतरण आदेशों के पीछे भ्रष्टाचार को देखते हुए इसकी सीबीआई जांच कराई जाए।