यह है मामला
लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी और सुहेलदेव आर्मी के योगेश पासी ने मुद्दा उठाया था कि कसमंडी कलां में बना मकबरा और मस्जिद वर्ष 980 से 1031 के दौरान राजपासी राजा कंस शिव मंदिर और किला था।
इसकी दीवारों पर आज भी हिंदुओं की परंपरागत आकृतियां बनी हुई हैं, जिसे दूसरे समुदाय के लोगों ने मस्जिद और मकबरे में तब्दील कर दिया। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में भूमि कब्रिस्तान दर्ज है।
इसमें किसी प्रकार का कोई नया निर्माण नहीं कराया गया है। सैकड़ों वर्ष पुराने मकबरे में कब्रें बनी हुई हैं और मस्जिद में प्रत्येक जुमे की नमाज होती आई है। इस मुद्दे को इतने साल के बाद उठाकर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।