ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि प्रदेश में छह साल से बिजली दर नहीं बढ़ी है। घरेलू उपभोक्ताओं का टैरिफ देश के अन्य राज्यों से कम है। प्रदेश के लोगों को 24 घंटे बिजली मिल रही है। प्रति व्यक्ति खपत 724 यूनिट बिजली है। यह पहली बार हुआ है। वह विधानसभा में नियम 56 के तहत लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर जवाब दे रहे थे।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पहले 12 हजार की अधिकतम बिजली मांग होती थी। अब 31 हजार मेगावाट आपूर्ति का आंकड़ा पार हो गया है। विद्युत वितरण कंपनियों की रेटिंग में सुधार हुआ है। देशस्तर पर हुए सर्वे में पहली बार उत्पादन और ट्रांसमिशन में अवार्ड मिला है। सौर ऊर्जा का उत्पादन 28 हजार मेगावाट हो रहा है। 45 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने राहत योजना का लाभ लिया है। इससे निगमों को आठ हजार करोड़ से ज्यादा राजस्व मिला है। शिकायतें कम करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बिलिंग और स्टीमेट की समस्या सभी सदस्यों ने उठाया है। अब इसमें बदलाव किया गया है। इसी कड़ी में स्मार्ट मीटर की व्यवस्था की गई है। स्मार्ट मीटर में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि निजीकरण का बेवजह हल्ला मचाने की जरूरत नहीं है। ऊर्जा क्षेत्र में पहली बार सपा शासनकाल में निजी कंपनी आई। हम ऊर्जा क्षेत्र में कोई भी कदम उठाएंगे तो जनता और कर्मचारियों के हित को ध्यान में रखेंगे।
इससे पहले सपा विधायक फहीम अहमद ने कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल का निजीकरण करना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने निजीकरण प्रक्रिया पर रोक लगाने, बिजली दरों में प्रस्तावित वृद्धि को वापस लेने, स्मार्ट मीटर और बिलिंग से संबंधित किसानों की जांच कराने की मांग की। आरोप लगाया कि 15 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के यहां लगाए गए स्मार्ट मीटर जांच में फेल हो गए हैं। विधायक पंकज पटेल और एचएन पटेल ने कहा कि बिजली निगमों द्वारा कई तरह के चार्ज लिए जा रहे हैं। 10 हजार से ज्यादा बिल होने पर कनेक्शन काटा जाता है और फिर वसूली की जाती है।