प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू की मार झेल रहे होटल-रेस्टोरेंट, वाणिज्यिक संस्थानों व छोटे दुकानदारों के बाद अब सूक्ष्म व लघु उद्योगों ने भी बिजली के फिक्स्ड चार्ज को माफ करने की मांग उठाई है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार को पत्र भेजकर कोरोना से उद्योग-धंधों के बुरी तरह से प्रभावित होने का हवाला देते हुए कम से कम छह महीने का फिक्स्ड चार्ज माफ करने का अनुरोध किया है। इस बीच वाणिज्यिक व छोटे उद्योगों को राहत देने के लिए सरकार की ओर से केंद्र से मदद मांगने की तैयारी की जा रही है।
पिछले दिनों राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की ओर से ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को प्रस्ताव सौंपकर कोरोना संकट के मद्देनजर होटल-रेस्टोरेंट, वाणिज्यिक संस्थानों व छोटे दुकानदारों को बिजली के फिक्स्ड चार्ज, मिनिमम चार्ज व डिमांड चार्ज में राहत की मांग की गई है। अब इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश व तालकटोरा इंडस्ट्रियल इस्टेट इंडस्ट्रीज ओनर्स एसोसिएशन ने सरकार को पत्र भेजकर छह माह तक फिक्स्ड चार्ज में छूट की मांग की गई है। इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मो. यूनुस सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में कहा है कि कोरोना महामारी व कोरोना कर्फ्यू के कारण सूक्ष्म व लघु उद्योगों का काम बिलकुल ठप चल रहा है। 2020 से उद्योगों पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सूक्ष्म व लघु उद्योग अभी पिछले वर्ष के घाटे से उबर भी नहीं पाए थे कि 2021 में फिर कोरोना कर्फ्यू व बाजार बंदी से उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि उद्योगों को पूरी तरह से खत्म होने से बचाने के लिए सरकार को उनके साथ सहानुभूति रखते हुए ज्यादा से ज्यादा सहायता उपलब्ध करानी होगी।
मो. यूनुस ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि सूक्ष्म व लघु उद्योगों के बिजली फिक्स्ड चार्ज को छह महीने के लिए माफ कर दिया जाए जिससे उद्योग पुनर्जीवित हो सकें। तालकटोरा इंडस्ट्रियल इस्टेट इंडस्ट्रीज ओनर्स एसोसिएशन के महासचिव दीपक विरमानी ने ऐसा ही पत्र ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को लिखा है। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि कामर्शियल उपभोक्ताओं व छोटे उद्योगों को राहत देने के लिए केंद्र से मदद मांगने पर मंथन चल रहा है। जल्द ही इस संबंध में फैसला किया जाएगा। ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि किसी तरह की छूट देने के बारे में फैसला सरकार के स्तर से ही हो सकता है। अभी कोशिश यही की जा रही है कि उपभोक्ताओं पर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ न पड़े। इसी के मद्देनजर सरकार ने बिजली दरें न बढ़ाने का एलान किया है।