ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पत्र में लिखा है कि 29 मई को फ्यूल एंड पावर पर्चेज एडजस्ममेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) 10 फीसदी लगा दिया गया। यह धनराशि उपभोक्ताओं से जून माह के बिल में वसूलने का निर्देश दिया गया। यह जानकारी उन्हें विभाग से मिलने के बजाय मीडिया से मिली। उन्होंने चेतावनी देते हुए लिखा है कि व्यापक असर वाले ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर विभाग के मंत्री की सहमति क्यों नहीं ली गई? कम से कम ऐसे निर्णय की पूर्व जानकारी देना क्या उचित नहीं था? भविष्य में ऐसी बातों का पुनरावर्तन न हो इसका ध्यान रखा जाए।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा
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ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पत्र में यह भी कहा है कि गर्मी के चुनौतीपूर्ण समय में तमाम विद्युत कर्मियों ने निष्ठापूर्वक कार्य किया है, लेकिन कुछ कार्मयों ने जानबूझकर अथवा लापरवाह होकर कार्य करते हुए सरकार को बदनाम किया है। ऐसे कर्मियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए एवं वर्तमान ट्रांसफर सीजन में इनका यथायोग्य तबादला किया जाय। इस विषय में विस्तृत जानकारी उन्हें भी दी जाए।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पावर कार्पोरेशन अध्यक्ष के बिना बताए बाहर जाने पर भी आपत्ति जताई है। पत्र में लिखा है कि मई माह में आंधी तूफान के कारण विद्युत अवसंरचना बुरी तरह प्रभावित हुई है। 30 मई की समीक्षा बैठक में पता चला कि ऐसी चुनौतीपूर्ण समय में आप मुख्यालय से बाहर है। आगे भी तीन दिन बाहर रहेंगे। आग्रह करने पर आनलाइन बैठक हुई। यह किसी भी उच्च अधिकारी का यह व्यवहार जनहित के विपरित एवं गैर जिम्मेदाराना है। भविष्य में मुख्यालय छोडने से पहले मुझे अवगत कराया जाए।
क्या कहते हैं अध्यक्ष
ऊर्जा मंत्री के पत्र की जानकारी मिली है। मुझे इस संबंध में कुछ नहीं कहना है। बस इतना कहेंगे कि उपभोक्ताओं का हित सर्वोपरि है।- डॉक्टर आशीष कुमार गोयल, अध्यक्ष पावर कार्पोरेशन।