प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की तर्ज पर अब शहरी क्षेत्रों में झील, तालाब व पोखरों से अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलेगा। इसके लिए नगर विकास विभाग कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इसमें यह ध्यान रखा जा रहा है कि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो। वहीं जल नीति के प्रावधानों के मुताबिक तालाबों पर अतिक्रमण न रोक पाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी कार्ययोजना में किया जाएगा। स्थानीय निकाय निदेशालय ने इस बाबत सभी नगर निकायों से तालाबों, पोखरों व झीलों की सूची मांगी है।
शहरी क्षेत्रों में स्थित तालाबों, पोखरों और झीलों की घटती संख्या व बढ़ते अतिक्रमण की शिकायतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अतिक्रमण मुक्त करने और दोबारा अतिक्रमण न होने देने को ध्यान में रखकर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया था। उन्होंने अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी प्रावधान करने को कहा था। इसके मद्देनजर नगर विकास विभाग ने इससे संबंधित कार्ययोजना तैयार करने की कार्यवाही शुरू की है। प्रस्तावित कार्ययोजना का जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रजेंटेशन किया जाएगा।
अतिक्रमण रोकने के लिए बनेंगे सख्त प्रावधान
शहरी क्षत्रों में तालाब और झीलों पर अतिक्रमण करने वाले भूमाफिया पर शिकंजा कसने के लिए संबंधित कायदे-कानूनों को और सख्त किया जाएगा। ऐसा करने वाले लोगों को कम से कम तीन साल की सजा का प्रावधान किया जा सकता है। हालांकि प्रस्तावित प्रावधानों में संशोधन पर विधिक राय लेकर ही फैसला किया जाएगा।
निकायों की ही होगी रखरखाव की जिम्मेदारी
तालाबों, पोखरों व झीलों के संरक्षण के लिए भी कार्ययोजना में कई प्रस्ताव किए जा रहे हैं। नगर निकाय की सीमा में स्थित सभी तालाबों व झीलों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी संबंधित नगर निकायों को सौंपी जाएगी। हालांकि कार्ययोजना लागू होने के शुरुआती पांच साल तक तालाबों व झीलों के रखरखाव पर आने वाला खर्च सरकार वहन करेगी। इसके बाद सारा खर्च नगर निकाय को उठानी होगी।