बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की सघन जांच, देर शाम एटीएस भी पहुंची
सूचना पर सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी, सिविल कोर्ट सुरक्षा प्रभारी परशुराम ओझा, उप निरीक्षक अखिलेश तिवारी सहित पुलिस बल के जवान और सुरक्षा एजेंसियां तत्काल मौके पर पहुंच गईं। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीम ने अधिवक्ताओं के चैंबरों, शेडों और कचहरी के सभी स्थलों पर बारीकी से तलाशी ली। घंटों चली सघन जांच के बाद भी कोई भी संदिग्ध वस्तु या बम नहीं मिला, जिसके बाद पुलिस और अधिवक्ताओं ने राहत की सांस ली। देर शाम एटीएस की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।
तमिलनाडु से भेजे गए मेल की भाषा तमिल में थी, जांच जारी
फैजाबाद जिला जज के आधिकारिक मेल पर अज्ञात व्यक्ति की ओर से भेजे गए मेल में लिखा था कि जजों और वकीलों को मारने का हलाल तरीका पवित्र शुक्रवार को है। ठीक 1:30 बजे कोर्ट में 18 बम ब्लास्ट होंगे। चर्चा है कि यह मेल तमिलनाडु से भेजा गया था और इसकी भाषा भी तमिल में थी, जिसका अनुवाद कराने के बाद धमकी की जानकारी मिली। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है। इसके पहले राम मंदिर ट्रस्ट को भी तमिलनाडु से धमकी भरा ई-मेल भेजा गया था।
पहले भी आतंकियों के निशाने पर रही है फैजाबाद कचहरी
यह पहली बार नहीं है जब फैजाबाद कचहरी को निशाना बनाया गया हो। वर्ष 2007 में इसी तरह दोपहर एक बजे फैजाबाद, लखनऊ और वाराणसी की कचहरियों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। फैजाबाद कचहरी में शेड नंबर 4 में हुए बम धमाके में वरिष्ठ अधिवक्ता राधिका प्रसाद मिश्रा, मुंशी फागू राम, स्टांप वेंडर ओम प्रकाश पांडेय और वादकारी केसरी की मौत हो गई थी।
इस घटना में करीब 50 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। उस समय कचहरी के कई जगहों पर साइकिल बम प्लांट किए गए थे, लेकिन पुलिस की सक्रियता से उन्हें डिफ्यूज कर दिया गया था। इस मामले में एटीएस ने वर्ष 2008 में चार अभियुक्तों सजादुर्रहमान, तारिक कासमी, मोहम्मद अख्तर उर्फ तारिक और खालिद मुजाहिद को गिरफ्तार किया था।