बिजली कर्मचारियों की महापंचायत में हुआ था ये फैसला।
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पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजलीकर्मी मैदान में उतर गए हैं। वे घर-घर जाकर लोगों को निजीकरण की खामियां बता रहे हैं। यह समझा रहे हैं कि निजीकरण हुआ तो बिजली दरों में बढ़ोतरी होगी। निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने जनसंपर्क अभियान शुरू किया है। इसके तहत विद्युत उपभोक्ताओं, विभिन्न संगठनों के लोगों को निजीकरण से होने वाले नुकसान की जानकारी देते हुए आंदोलन में हिस्सा लेने की अपील की जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजा। इसमें निजीकरण में घोटाले की आशंका जताते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों संजय सिंह चौहान, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय ने कहा कि ट्रांजेक्शन एडवाइजर कंपनी ग्रांट थार्नटन को अवैध ढंग से नियुक्त किया गया। अब उसी के प्रस्ताव पर निजीकरण की तैयारी है। इसी बीच मंगलवार को फील्ड हास्टल में हुई संघर्ष समिति की बैठक में भविष्य में चलने वाले आंदोलन को धार देने की रणनीति तैयार की गई। तय किया गया कि निजीकरण के विरोध में विभिन्न जिलों एवं परियोजनाओं पर आंदोलन जारी रहेगा।