इस प्रस्ताव में बताया कि अपवादों को छोड़ कर जितनी बिजली का बिल उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है, उसके सापेक्ष पूरी वसूली नही हो पा रही है। विद्युत दरों को तय करने के लिए 100 प्रतिशत कलेक्शन एफिशियेन्सी मानना पूर्णतः अव्यवहारिक है। ट्रांसफॉर्मरों की क्षतिग्रस्तता अभी भी 10 प्रतिशत से अधिक चल रही है। विद्युत बिल वसूली अभियान चलाने के उपरान्त भी 54.242 लाख उपभोक्ताओं ने एक बार भी बिजली के बिल का भुगतान नही किया है। इन सभी उपभोक्ताओं पर 36,353 करोड़ बकाया है। वहीं 78.65 लाख लोगों ने पिछले छह माह से बिजली बिल का भुगतान नहीं किया है।
इन पर भी 36,117 करोड़ बिजली का बिल बकाया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन एवं डिस्कॉम्स का कुल खर्चा 107,209 करोड़ रहा है, जिसमें मुख्य रूप से ऊर्जा क्रय में 77,013 करोड़, परिचालन एवं अनुरक्षण में 7,927 करोड़, व्याज के भुगतान में 6,286 करोड़ तथा मूल ऋण के भुगतान में 15,983 करोड़ खर्च हुआ है, जबकि राजस्व मात्र 67,955 करोड़ ही प्राप्त हुआ है। इस प्रकार कुल कैश गैप 39,254 करोड़ रहा। इसे पूरा करने के लिए 19,494 करोड़ की धनराशि सब्सिडी के तौर पर दिया तथा 13,850 करोड़ की धनराशि लॉस फण्डिंग/अनुदान के रूप में सरकार ने देकर मदद की। फिर भी शेष 5,910 करोड़ रूपये के कैश गैप को पावर कॉरपोरेशन एवं डिस्कॉम्स द्वारा अतिरिक्त ऋण लेकर पूरा किया गया। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2024-25 में पावर कॉरपोरेशन एवं डिस्कॉम्स का कुल खर्चा 1,10,511 करोड़ रहा है। ऊर्जा क्रय व्यय विगत वर्ष से 12 प्रतिशत तथा परिचालन एवं अनुरक्षण खर्च में व्यय 6 प्रतिशत बढ़ गया है। इन खर्चों के विरूद्ध मात्र 61,996 करोड़ ही राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विगत वर्ष से 8 प्रतिशत कम है।