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UP Chunav Results 2024: एजेंडे की धार और एकजुटता; सपा ने मैनपुरी तो कांग्रेस ने रायबरेली-अमेठी मॉडल अपनाया

Wed, 05 Jun 2024 09:53 AM IST
शाहरुख खान चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ

सार

यूपी में एजेंडे की धार और एकजुटता से इंडिया गठबंधन को कामयाबी मिली है। जातिगत जनगणना, संविधान की रक्षा और बेरोजगारी का एजेंडा जीत का आधार बना। प्रचार से लेकर बूथ प्रबंधन तक की रणनीति में सपा-कांग्रेस के बीच समन्वय दिखा। अल्पसंख्यक वोटों का बंटवारा नहीं हुआ। दलितों का भी साथ मिला।
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UP Election Result - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस और सपा गठबंधन अपने एजेंडे को धार देने में कामयाब रहा। दोनों दलों ने आपसी समन्वय दिखाते हुए मतदाताओं के बीच जातिगत जनगणना कराने और संविधान की रक्षा का संदेश पहुंचाया। ऐसे में अल्पसंख्यकों की एकजुटता बनी रही और दलित मतदाताओं का भी साथ मिला, जिसका नतीजा रहा कि उन्हें प्रदेश में बड़ी कामयाबी मिली।
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प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटों में 62 पर सपा, 17 पर कांग्रेस और एक पर तृणमूल कांग्रेस मैदान में थी। सपा और कांग्रेस को जनता का भरपूर समर्थन मिला। वे एनडीए से अधिक सीटें जीतने में कामयाब रहे। इस जीत के पीछे दोनों दलों की पुख्ता रणनीति रही। 

सपा और कांग्रेस ने अगड़ों की परवाह किए बिना जातीय जनगणना के जरिये खुलकर पिछड़ा और दलित कार्ड खेला। इससे पिछड़े और दलित वोटबैंक की एकजुटता बनी रही। दोनों ने धर्म की वकालत की, लेकिन राम मंदिर से दूरी बनाए रखी। 
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इससे वे अल्पसंख्यकों का भरोसा कायम रखने में कामयाब रहे और उन्हें जोड़ने में भी सफल रहे। राहुल गांधी ने लगातार सामाजिक न्याय की वकालत कर पूरे चुनाव पर मंडल बनाम कमंडल की छाया डालने की कोशिश की। इसका भी उन्हें फायदा मिला।

चरणवार बदली रणनीति
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने चरणवार रणनीति बदली। पहले और दूसरे चरण में सिर्फ अल्पसंख्यकों पर फोकस किया तो अवध, पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड में सोशल इंजीनियरिंग का फाॅर्मूला अपनाया। विधानसभा क्षेत्रवार जिस इलाके में जिस जाति का वर्चस्व है, उसमें उसी जाति के नेता को उतारा। पार्टी के बैनर में डॉ. आंबेडकर के साथ ही ऊदादेवी पासी, संत गाडगे जैसे दलित संतों की तस्वीर लगाई। ऐसे में दलितों को भरोसा हुआ कि उनके हक की बात इंडिया गठबंधन ही कर रहा है।

 

रोजगार के मुद्दे पर युवाओं का मिला साथ
कांग्रेस ने न्याय पत्र के जरिये महिलाओं, छात्रों, किसानों, मनरेगा मजदूरों के लिए अलग-अलग घोषणाएं करके उन्हें जोड़े रखा। घर-घर पहुंचने वाली टीम चुनाव को लेकर तैयार किए गए घोषणापत्र और कांग्रेस के 10 साल एवं सपा के पांच साल के कार्यकाल की उपलब्धियों से संबंधित पर्ची भी थमाती रही।

इसमें मनरेगा से लेकर कन्या विद्याधन तक का जिक्र किया गया। कांग्रेस ने घोषणापत्र में 30 लाख सरकारी नौकरियां देने का एलान किया। इसे घर-घर पहुंचाया गया, जिसकी वजह से युवा गठबंधन की ओर घूम गए।

 

सपा ने मैनपुरी और कांग्रेस ने रायबरेली-अमेठी मॉडल अपनाया
मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हुए उपचुनाव में मैनपुरी में सपा ने नई रणनीति बनाई थी, जिस इलाके में सपा को वोट मिलने की संभावना नहीं थी, वहां फ्रंटल संगठन के कार्यकर्ताओं को लगाकर टोह ली। वे मतदाताओं को समझाने में कामयाब रहे। इस चुनाव में भी यह फॉर्मूला अपनाया गया। कांग्रेस ने अमेठी और रायबरेली में सेक्टरवार समीकरण बनाया। हर विधानसभा क्षेत्र को सेक्टरवार बांटा गया।
 
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संबंधित सेक्टर में मतदाताओं के जातिगत आंकड़ों के आधार पर संबंधित बिरादरी के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई। बूथों पर स्थानीय कमेटी के साथ ही जिला एवं प्रदेश स्तरीय नेताओं को लगाया गया है। कार्यकर्ताओं को प्रचार के तरीके, सोशल मीडिया का प्रयोग, स्थानीय स्तर के कार्यकर्ता को जोड़ने की रणनीति बनाने की तकनीक सिखाई गई।
 
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