आईपीएल में 23 मार्च और 21 अप्रैल के मैच आपको याद होंगे! कोलकाता नाइटराइडर्स ने सनराइजर्स हैदराबाद को कांटे के मुकाबले में चार रन से हराया था। सांस रोक देने वाले मैच में कोलकाता नाइटराइडर्स ने रॉयल चैलेंजर्स बंगलुरू को एक रन से शिकस्त दी थी।
चार जून को मतगणना के दौरान प्रदेश की 12 सीटों पर मुकाबला भी कुछ ऐसा ही था। इन सीटों पर आखिरी राउंड तक संघर्ष चला। इन सीटों पर सपा, भाजपा और कांग्रेस ने ऐसा उलटफेर किया कि सारी भविष्यवाणियां फेल हो गईं।
वोटरों की जुगलबंदी राजनीतिक दलों के गुणा-भाग पर भारी पड़ गई। एक-एक रन की तरह एक-एक वोट की मारामारी देखने को मिली। मतगणना स्थलों में कभी जीत का शोर उठते ही नारेबाजी होने लगती तो कभी पीछे होते ही समर्थक गम में डूब जाते।
इसे लोकतंत्र की ही खासियत कहा जाएगा कि जिन सीटों पर पिछले लोकसभा चुनावों में लाखों वोट से प्रत्याशी जीते थे। इस बार एक-एक वोट पर नजर रखे दिखाई दिए। हमीरपुर सीट भाजपा ने ढाई लाख वोटों से जीती थी। इस बार 2600 वोटों से हार गई। ऐसे ही रोचक परिणाम इन 12 सीटों पर दिखाई दिए।
कांटे की लड़ाई वाली सीटें
| लोकसभा |
विजयी प्रत्याशी |
पार्टी |
रनर अप प्रत्याशी |
पार्टी |
जीत का अंतर |
| अलीगढ़ |
सतीश गौतम |
भाजपा |
बिजेन्द्र सिंह |
सपा |
15647 |
| अमरोहा |
कंवर सिंह तंवर |
भाजपा |
कुंवर दानिश अली |
कांग्रेस |
28670 |
| आंवला |
नीरज मौर्या |
सपा |
धर्मेन्द्र कश्यप |
भाजपा |
15969 |
| बदायूं |
आदित्य यादव |
सपा |
दुर्विजय सिंह |
भाजपा |
34991 |
| बांसगांव |
कमलेश पासवान |
भाजपा |
सदल प्रसाद |
कांग्रेस |
3150 |
| धौरहरा |
आनंद भदौरिया |
सपा |
रेखा वर्मा |
भाजपा |
4449 |
| फर्रूखाबाद |
मुकेश राजपूत |
भाजपा |
नवल किशोर शाक्य |
सपा |
2678 |
| हमीरपुर |
अजेन्द्र सिंह |
सपा |
कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह |
भाजपा |
2629 |
| कानपुर |
रमेश अवस्थी |
भाजपा |
आलोक मिश्रा |
कांग्रेस |
20968 |
| मेरठ |
अरुण गोविल |
भाजपा |
सुनीता वर्मा |
सपा |
10585 |
| फूलपुर |
प्रवीण पटेल |
भाजपा |
अमरनाथ सिंह |
सपा |
4332 |
| सलेमपुर |
रामशंकर राजभर |
सपा |
रविन्द्र कुशवाहा |
भाजपा |
3573 |
पिछले लोकसभा चुनाव के परिणाम
अलीगढ़ 2.25 लाख से ज्यादा वोटों से भाजपा जीती थी। इस बार 15 हजार से जीत सकी।
मेरठ में पिछली बार भी टक्कर थी और भाजपा केवल 2 हजार वोटों से जीत सकी थी।
बदायूं में 20 हजार वोटों के अंतर से भाजपा जीती थी।
आंवला में 1.10 लाख वोट से ज्यादा के साथ भाजपा ने जीत का स्वाद चखा था।
धौरहरा में भाजपा 1.5 लाख वोटों से जीती थी।
फर्रूखाबाद में 2.25 लाख वोटों से भाजपा ने जीत दर्ज की थी।
कानपुर की सीट भाजपा ने 1.5 लाख वोटों से जीती थी।
हमीरपुर सीट भाजपा ने 2.5 लाख वोटों से जीती थी।
फूलपुर सीट भाजपा ने 1.75 लाख वोटों से जीती थी।
बांसगांव सीट भाजपा ने 1.5 लाख वोटों से जीती थी।
सलेमपुर सीट भाजपा ने एक लाख से ज्यादा वोटों से जीती थी।
अमरोहा सीट बसपा ने करीब 60 हजार वोटों से जीती थी।
कांटे के संघर्ष के कारण
अलीगढ़ - पूर्व सांसद जाट थे। जाटों की गोलबंदी का असर।
अमरोहा - 1991 में क्रिकेटर चेतन चौहान ने पहली बार कमल खिलाया। पिछले चुनाव में दानिश अली बसपा के टिकट पर जीते थे। इस बार कांग्रेस के टिकट पर उतरे। करीब 38 फीसदी मुस्लिम वोटरों के अलावा बसपा के वोटों में भी सेंध से भाजपा की राह कठिन हो गई।
आंवला - सपा ने हमेशा मुस्लिम प्रत्याशी को लड़ाया। इस बार नीरज मौर्या को टिकट दिया। इस वजह से मौर्य वोटर शिफ्ट हुआ। मुस्लिम-यादव फैक्टर और धर्मेन्द्र कश्यप से ठाकुरों की नाराजगी भी बड़ी वजह। विवादित वीडियो ने बड़ी भूमिका निभाई।
- बदायूं- दोनों प्रत्याशियों का पहला चुनाव था। सपा का मजबूत वोटर आधार था। शिवपाल सिंह ने अपने बेटे आदित्य के लिए पूरी ताकत झोंक दी। विरोध को एकजुट करने में सफल रहे।
- बांसगांव- यहां योगी आदित्यनाथ का खासा प्रभाव है। बसपा के रामसमुझ ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया। सदल प्रसाद पिछला चुनाव बसपा से लड़े थे। इस बार कांग्रेस का हाथ थामा। कांग्रेस के परंपरागत वोटों के साथ बसपा वोटरों में भी सेंध लगाई।
- धौरहरा- जातीय लामबंदी का असर रहा। खास तौर पर ब्राह्मण, ठाकुर, यादव और मुस्लिमों ने एकतरफा वोट किया। रेखा वर्मा का सवर्ण विरोधी बयान और महोली विधानसभा में विधायक के साथ जूता कांड का भी असर रहा। बसपा से खड़े प्रत्याशी ने भी सेंध लगाई, जो पहले भाजपा में थे।
- फर्रुखाबाद- शाक्य वोट भाजपा का परंपरागत वोट था। प्रत्याशी से नाराज होकर सपा में चला गया।
- हमीरपुर - पिछड़े वर्ग ने एकजुट होकर वोट दिया। ग्रामीण इलाकों में सेना में भर्ती के लिए बड़ी संख्या में बच्चे तैयारी करते हैं। अग्निवीर योजना को लेकर नाराजगी। साथ ही संविधान में बदलाव और आरक्षण खत्म करने के दावों ने भी असर डाला।
- कानपुर - अपने मजबूत गढ़ में भी जीत के लिए भाजपा को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। वजह बरसों से मेहनत कर भाजपा नेताओं को किनारे कर नए चेहरे को टिकट दिया गया। बाहरी का ठप्पा लगा। जमकर भितरघात हुआ। कांग्रेस प्रत्याशी के स्थानीय और ब्राह्मण होने से टक्कर। ब्राह्मणों के साथ मुस्लिम-यादव और एससी वोट का गठबंधन के साथ जाने का असर।
- मेरठ- सामान्य सीट होने के बावजूद सपा ने दलित प्रत्याशी उतार दिया। परिणाम ये रहा कि बसपा का वोटर सपा में शिफ्ट हो गया। इसके अलावा मुस्लिम शिफ्ट हो गया। अरुण गोविल का बाहरी फैक्टर चला। भाजपा का वोटर बाहर नहीं निकला। बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी ने भाजपा के परंपरागत वोट काटे।
- फूलपुर- तीन लाख से ज्यादा कुर्मी और ढाई लाख यादव वोटर निर्णायक साबित हुए। मुस्लिम वोटरों ने एकतरफा जाकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया।
- सलेमपुर - जातीय गोलबंदी का जबर्दस्त असर। देवरिया की दो और बलिया की तीन विधानसभा सीटों को मिलाकर ये संसदीय क्षेत्र बना। बलिया की तीनों विस सीटें हार का कारण बनीं क्योंकि वहां राजभर वोटर अच्छी खासी संख्या में हैं।