Kaiserganj Lok Sabha Election: देवीपाटन मंडल में रियासत-विरासत के साथ वर्चस्व की जंग है। सियासी रण में रोमांच बढ़ गया है। मंडल की चारों सीटों में भले ही तीन पर हैं दावेदार फिर भी सियासी रंग चटख है। चिलचिलाती धूप से राजनीति के दांवपेच की तपिश कम नहीं है।
अवध के तीन मंडलों में शामिल देवीपाटन की सियासी धमक सूबे में अलग ही है। यहां के चारों लोकसभा क्षेत्रों की अपनी खास राजनीतिक रसूख भी है। भले अभी तीन सीटों पर ही प्रत्याशियों का दम दिख रहा है, लेकिन बिना लड़ाके के ही कैसरगंज में सियासी शोर मचा हुआ है।
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पार्टियों की चौखट से टिकट के बाहर आने के इंतजार में भी रोमांचक दौर चल रहा है, वहीं तीन अन्य सीटों पर रियासत, विरासत और वर्चस्व की जंग देखते ही बन रही है। मतदाताओं को साधने में पूरे दिन झुलस रहे रणबांकुरों पर सहालग का मरहम भी है। शाम की पारी निमंत्रण के बहाने ही सही, राजनीति में रंग और रम जा रही है।
अयोध्या से सटी गोंडा संसदीय सीट पर रियासत के सियासी सफर को कायम रखने की कशमकश दिख रही है। यहां विरासत को मुकाम देने की जद्दोजहद भी है। चुनौती ऐसी है कि राजनीतिक महारथियों के माथे पर बल भी दिख रहा है। पांचवीं बार संसद की दहलीज लांघने को बढ़ रहे कदम के सामने सियासी घराने की पीढ़ी को भी चुनौती मिल रही है।
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यहां का चुनाव दिनोंदिन जातीय समीकरण की ओर बढ़ रहा है। गोंडा संसदीय सीट से सटे श्रावस्ती संसदीय क्षेत्र में भी विरासत व विकास की सियासत चरम पर है। दलों ने प्रत्याशियों को उतारकर राजनीतिक माहौल को नया मोड़ तो दिया है, लेकिन चुनाव सीमित दायरे में सिमटता दिख रहा है।
पूरी दुनिया में वर्चस्व कायम करने में श्रावस्ती का मतदाता खामोशी से धुरंधरों के दांव पर पैनी नजर रखे है। आमने- सामने की बनती सियासी जंग में परंपरागत मतों के साथ ही हाल के दिनों में जुड़े युवा मतदाता चुनाव में बड़ा दांव चलने को तैयार हैं।
बहराइच सुरक्षित सीट पर लड़ाकों की महफिलें सज गईं हैं और एक दूसरे को चुनौतियां देने में तीनों मुस्तैद हैं। दिलेरी और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पहचाने जाने वाले क्षेत्र में अब सियासी लहरों की कलाबाजियां नए रस घोल रहीं हैं।
तीनों दलों ने बहुत सधे अंदाज में प्रत्याशियों का चयन किया है, जिससे चुनाव रोचक दौर से गुजर रहा है। यहां भी विरासत के साथ ही पार्टियों के दबदबे की धूम है। कैसरगंज में अभी लड़ाकों के इंतजार का दौर तो नहीं थमा है, लेकिन दलों की चर्चाएं हवाओं हवाओं में तारी हैं। चारों सीटाें में कैसरगंज की केसरी महक धूम मचाए है।
दिल्ली के फैसले पर टिकी नजर, हर दिन आहट
कैसरगंज में भाजपा के पैंतरे से सभी दलों में दावेदारों की तस्वीर धुंधली है। स्थानीय और राजधानी से स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। दिल्ली के फैसले पर ही लोगों की नजर टिकी है। माना जा रहा है कि जो भी फैसला होगा, बड़े स्तर से ही संभव है। वहीं भाजपा के फैसले पर ही सपा व बसपा की भी नजर है। सोमवार को नामांकन की रफ्तार तेज होने के साथ ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मंडल में आम लोगों के अहम मुद्दे
गोंडा संसदीय सीट में शिक्षा व विकास के साथ ही रोजगार अहम मुद्दा है। एशिया में मशहूर आईटीआई मनकापुर कई सालों से बेकार है। नवाबगंज चीनी मिल बंद चल रही है। गोंडा-अयोध्या मार्ग के चौड़ीकरण की जरूरत बताई जा रही है। बलरामपुर मार्ग पर इटियाथोक के बिसुही नदी का पुल, नगर पंचायत का दर्जा व खरगूपुर को ब्लॉक बनाने का आज भी मुद्दा है। इंजीनियरिंग कॉलेज की पढ़ाई अंबेडकरनगर में होना और मेडिकल कॉलेज की मान्यता।
श्रावस्ती में तो रेलवे व बस स्टेशन की कमी के साथ ही बाढ़ व आग से बचाव के इंतजाम की जरूरत है। पिछड़ेपन को दूर करने की कवायद को मुकाम दिलाना तथा जंगली जानवरों का काबू करने की पहल। कैसरगंज में बाढ़ के साथ ही लखनऊ मार्ग की राह में दो ओवरब्रिज, सरयू व घाघरा का जर्जर पुल, राज्य विश्वविद्यालय न मिलना अहम है। बहराइच में बाढ़ व आग के साथ ही रोजगार सृजन व विकास कार्य भी बड़ा मुद्दा है।