कोठी को गिराने से पहले पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सर्च अभियान चलाया। कोठी से मिले घरेलू व अन्य सामग्री को सुरक्षित निकाला गया। उतरौला सीओ राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि किसी तरह से कोई नुकसान न हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया। केवल अवैध निर्माण को ही हटाया गया।
पीएसी और पांच थानों की फोर्स के साथ जमे रहे अफसर
ध्वस्तीकरण के समय पांच थानों की पुलिस व एक प्लाटून पीएसी तैनात की गई थी। प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह ने सुबह ही पूरी कोठी की घेराबंदी कर दी थी। एएसपी विशाल पांडेय व सीओ राघवेंद्र प्रताप सिंह ने ध्वस्तीकरण के पहले परिसर का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान जिलाधिकारी पवन अग्रवाल, एसपी विकास कुमार, एसडीएम राजेंद्र प्रसाद, तहसीलदार एसपी प्रजापति भी मौजूद रहे।
इसी कोठी के निर्माण को लेकर राजदार बब्बू से हुआ था छांगुर का विवाद
ध्वस्तीकरण की जद में आई कोठी के निर्माण से ही राजदार बब्बू उर्फ वसीउद्दीन से छांगुर का विवाद शुरू हुआ था। छांगुर ने मधपुर में अपना आशियाना और नीतू की कोठी के निर्माण का ठेका उतरौला के ही बब्बू को दिया था। बात 12 करोड़ पर हुई और निर्माण पर 12 करोड़ खर्च करने का दावा बब्बू ने किया। एटीएस ने जांच में भी उल्लेख किया है कि छांगुर ने बब्बू को 5.70 करोड़ ही दिए। बकाया राशि हड़पने के लिए उससे मारपीट कर ली, जिसकी रिपोर्ट उतरौला थाने में दर्ज हुइ। इसके बाद बब्बू के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में भी एफआईआर दर्ज करा दिया।