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यूपी: शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर कसा गया शिकंजा, सिर्फ शनिवार-रविवार को वसूला गया 2.65 करोड़ जुर्माना

Mon, 11 May 2026 07:56 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Drunk driving in UP: शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर यूपी पुलिस की सख्ती शुरू हो गई है। डीजीपी के निर्देश पर शनिवार और रविवार को चलाए गए अभियान में 2654 वाहनों का चालान हुआ। 
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यूपी में शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने के डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देश पर यातायात निदेशालय ने शनिवार और रविवार को पूरे प्रदेश में संयुक्त अभियान चलाया, जिसमें कुल 69,683 वाहनों की जांच की गई। शराब पीकर वाहन चलाने वाले 2,654 चालकों का चालान करने के साथ करीब 2.65 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया।

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दरअसल, पिछले वर्षों के सड़क दुर्घटना आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि वर्ष 2023 में 8.61 फीसदी दुर्घटनाएं शराब पीकर वाहन चलाने की वजह से हुई थीं। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 6.05 फीसदी और 2025 में 3.51 फीसदी रहा। समीक्षा में सामने आया कि सप्ताहांत पर कुछ लोग नशे में वाहन चलाते हैं। इससे मुख्य मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर रात में जान का गंभीर खतरा उत्पन्न होता है। प्रदेश के कुल 135 टोल प्लाजा पर चले अभियान में यातायात और नागरिक पुलिस के कुल 3,645 अधिकारी और कर्मचारी तैनात रहे।

मीट एंड ग्रीट की प्रक्रिया अपनाई
अभियान में महिला पुलिसकर्मियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने परिवार के साथ यात्रा कर रहीं महिलाओं से कुशलक्षेम (मीट एंड ग्रीट) पूछा और यात्रा के दौरान आईं समस्याओं के निराकरण का प्रयास किया। इसके अतिरिक्त, निर्माण सामग्री परिवहन करने वाले ट्रकों की भी जांच हुई। उनकी उच्च सुरक्षा पंजीकरण प्लेट का मौके पर ही सत्यापन किया गया।
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कानूनी प्रावधान और दंड
मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 185 के अनुसार शराब पीकर वाहन चलाना दंडनीय अपराध है। रक्त में अल्कोहल की मात्रा 30 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। श्वास विश्लेषक परीक्षण में असफल होने पर पहली बार 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगता है। इसके अतिरिक्त छह माह का कारावास या दोनों सजाएं भी मिल सकती हैं। अपराध की पुनरावृत्ति पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड या दो वर्ष का कारावास या दोनों का प्रावधान है।

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