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यूपी: महाकुंभ को लेकर सरकार-विपक्ष में तकरार, विपक्ष ने कहा नहीं हो सका 50 करोड़ लोगों की सुविधा का इंतजाम

Thu, 20 Feb 2025 07:23 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Up Vidhan Sabha Budget Satra: महाकुंभ को लेकर सरकार और विपक्ष में तीखी भिड़ंत देखने को मिली। 
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यूपी विधानसभा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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विधान परिषद में सपा सदस्यों ने बुधवार को महाकुंभ पर चर्चा का समय बढ़ाने की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। वे वेल में आ गए। सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने आधा घंटा समय बढ़ाने की मांग स्वीकार भी कर ली, पर वे इससे संतुष्ट नहीं हुए। इस पर सभापति ने नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव को सदन से बाहर चले जाने के निर्देश दिए। इसके बाद भी जब नेता प्रतिपक्ष सदन से नहीं गए तो उन्हें मार्शल अपने कंधों पर लादकर बाहर ले गए।

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कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिये सपा के डॉ. मान सिंह यादव और मुकुल यादव ने महाकुंभ के आयोजन में अव्यवस्थाओं का मुद्दा उठाया। कहा कि सत्ता पक्ष के लिए कुंभ भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कुंभ का पानी नहाने लायक नहीं रह गया है। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि 100 करोड़ लोगों के स्नान की व्यवस्था का दावा करने वाली सरकार 50 करोड़ लोगों के लिए भी समुचित इंतजाम नहीं कर सकी। मुआवजा न देना पड़ जाए, इसलिए घायलों और मृतकों की सही संख्या जारी नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुंभ में हुई भगदड़ में गाजीपुर के सर्वजीत की मौत हुई, लेकिन उसे कहीं रिकॉर्ड में नहीं लाया गया। घायलों और मृतकों को ट्रैक्टर-ट्रालियों से फिंकवाया गया।

सत्ता पक्ष के सुरेंद्र चौधरी समेत कई सदस्यों ने लाल बिहारी की बातों को असत्य बताते हुए विरोध किया। नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि कुंभ संसार का सबसे बड़ा मेला है। वहां हुई भगदड़ की घटना पर अफसोस है। इसमें कुल 30 लोगों की मौत हुई, जिसमें 29 की पहचान हो चुकी है। एक मृतक का डीएनए सैंपल सुरक्षित रख लिया गया है। 36 घायलों में से 35 इलाज के बाद घर जा चुके हैं। जबकि, एक अभी अस्पताल में भर्ती है।
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केशव ने कहा कि सपा के लोग अनहोनी पर नजर लगाए थे, ताकि उन्हें राजनीति का मौका मिल सके। निहत्थे रामभक्तों पर गोलियां चलाने वालों को कुंभ के आयोजन को लेकर अफवाह नहीं फैलानी चाहिए। सपा के लोगों को श्रद्धालुओं की नहीं, साइकिल के डूबने की चिंता है। सपा शासन में वर्ष 2013 में हुए कुंभ की अव्यवस्थाएं हम सबने देखीं। उपचुनाव में हार की हताशा के चलते सपा के सदस्य बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। इसके बाद सभापति ने कार्यस्थगन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य वेल में आ गए।

इसी बीच सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने व्यवस्था दी कि सदन में भव्य-दिव्य कुंभ पर एक घंटे चर्चा कराई जाएगी। शिक्षक दल के ध्रुव त्रिपाठी की मांग पर इस समय को बढ़ाकर डेढ़ घंटे कर दिया गया। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव समय को बढ़ाकर दो घंटे करने और इसमें एक घंटा का समय उनके दल के लिए देने की मांग करने लगे। पीठ से बार-बार आग्रह किए जाने के बावजूद जब सपा सदस्य अपनी सीटों पर नहीं लौटे तो सभापति ने कहा कि पीठ आपको (नेता प्रतिपक्ष को) इंगित करती है कि आप सदन का त्याग कर दें। इस पर मार्शलों ने लाल बिहारी को बाहर निकाल दिया। सभापति ने उन्हें पूरे दिन के लिए निष्कासित करने की व्यवस्था दी। लाल बिहारी को सदन से निकाले जाने के बाद सपा के अन्य सदस्य भी वेल से उठकर बाहर चले गए।

40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का था अनुमान
केशव ने कहा कि हमारा आकलन था कि कुंभ में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आएंगे। उसी के अनुसार तैयारियां की गई थीं। 100 करोड़ श्रद्धालुओं के लिहाज से तैयारियों की बात एक भाषण में कह दी गई थी, उसे पकड़कर चलना ठीक नहीं। डबल इंजन सरकार 2031 में कुंभ के आयोजन दिल खोलकर खजाना खर्च करेगी।

विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष को निकाला गया पहली बार
विधान परिषद में किसी नेता प्रतिपक्ष को पहली बार मार्शलों की मदद से इस तरह से निकाला गया। विधान परिषद के पुराने सदस्य बताते हैं कि विधानसभा में तो ऐसे दृष्टांत मिलते हैं, पर विधानसभा में कभी ऐसा नहीं हुआ।

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