Gen Z के लिए स्कूलों की निगरानी का डिजिटल मोड
सोशल मीडिया पर सक्रिय Gen Z और डिजिटल जनरेशन के लिए यह व्यवस्था खास मायने रखती है। स्कूलों से जुड़ी कोई समस्या, शिकायत या दावा सोशल मीडिया पर सामने आता है तो अब उसके तथ्यों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने पर जोर दिया गया है। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों तक सही जानकारी पहुंचाने तथा भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
मुख्य सचिव के निर्देश में स्कूलों में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, बिजली, नियमित पठन-पाठन और अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी के साथ अभिभावकों से नियमित संवाद पर भी जोर दिया गया है। प्वाइंटर-13 में शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों, अभिभावकों और एसएमसी सदस्यों के बीच नियमित संवाद तथा Parent-Teacher Association (PTA) की बैठकों को प्रभावशाली तरीके से आयोजित करने के निर्देश हैं।
शासन ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों को स्वच्छ, सुरक्षित, सुविधायुक्त और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। ऐसे में सोशल मीडिया पर आने वाली शिकायतों की त्वरित जांच और भ्रामक सूचनाओं के खंडन को स्कूल शिक्षा व्यवस्था की डिजिटल मॉनिटरिंग का अहम हिस्सा माना जा रहा है।