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UP: डिजिटल अरेस्ट 86 साल के पिता को बेटी ने ऐसे ठगे जाने से बचाया, 60 लाख रुपये वसूलने वाले थे जालसाज

Wed, 22 Apr 2026 11:07 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

जालसाजों ने सीबीआई व आरबीआई अधिकारी बनकर बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर लिया था और डरा धमकाकर 60 लाख रुपये वसूलने वाले थे। कुछ जरूरी गाइडलाइंस का पालन कर डिजिटल ठगी से बच सकते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मड़ियांव के शालीमार कोर्ट यार्ड निवासी पंचायती राज विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हामिद मुस्तफा को साइबर जालसाजों ने सीबीआई और आरबीआई अधिकारी बनाकर 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और 60 लाख रुपये वसूलने का प्रयास किया। उनकी बेटी हुमा की सतर्कता से उनको साइबर क्राइम सेल की मदद से मुक्त कराया गया और ठगे जाने से बचाया।

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एसीपी साइबर क्राइम सेल सौम्या पांडेय ने बताया कि आठ अप्रैल को हामिद मुस्तफा के पास एक अनजान नंबर से व्हाट्सऐप पर कॉल आई थी। फोनकर्ता ने खुद को सीबीआई और आरबीआई अधिकारी बन हामिद पर मानव तस्करी का झूठा आरोप लगाते हुए उनको डिजिटल अरेस्ट किया। आरोपियों ने उनको इस बारे में किसी को भी कुछ न बताने की धमकी भी दी थी।

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पिता की गतिविधियां असामान्य देख बेटी को हुआ शक
डिजिटल अरेस्ट किए गए 86 साल के हामिद मुस्तफा की गतिविधियों में बदलाव और असामान्य देख पहले तो परिजनों को कुछ शक नहीं हुआ। इस बीच वह न तो किसी को अपना मोबाइल छूने दे रहे थे और ना ही लैपटॉप। उनके व्यवहार में भी काफी बदलाव दिख रहा था। उनकी बेटी हुमा को इस पर शक हुआ। उन्होंने किसी तरह पिता से बातचीत की तो पता चला कि साइबर जालसाजों ने उनको डिजिटल अरेस्ट किया है। जालसाज बुजुर्ग हामिद से 60 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। बुजुर्ग इसके लिए राजी भी हो गए थे।

साइबर क्राइम सेल ने की काउंसलिंग
हामिद की बेटी हुमा ने फौरन साइबर क्राइम सेल से मदद मांगी। परिजनों के कहने पर इंस्पेक्टर साइबर क्राइम सुनील सिंह, दरोगा आदिल हसन और सिपाही सनीफ रजा ने बुजुर्ग हामिद की कई घंटे तक काउंसलिंग की और उसको डर व अवसाद से बाहर निकाला।

इस बात का ध्यान रखें
-किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर विश्वास न करें।
- व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें।
- डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ भी नहीं होता है। पुलिस किसी को भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है
- साइबर धोखाधड़ी और संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें, या साइबर सेल/पुलिस थाने को सूचित करें।

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