जानकारों की मानें तो बसपा में नसीमुद्दीन की वापसी नहीं होने की वजह मायावती का मुस्लिम नेताओं पर डिगा भरोसा है। लोकसभा चुनाव में मायावती ने तमाम मुस्लिम नेताओं को टिकट दिया था। उन्होंने कुल 21 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे। इनमें रविवार को सपा में शामिल हुए अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू भी शामिल थे, जिन्हें पीलीभीत से टिकट दिया गया था। हालांकि वह केवल 89,697 वोट पाकर तीसरे स्थान पर आए थे। मुस्लिमों ने वोट नहीं मिलने से बसपा 2019 के चुनाव में जीती अपनी 10 सीटों पर बुरी तरह पराजित हुई थी। इसके बाद मायावती ने कहा था कि मुस्लिम समाज को चुनाव में खासा प्रतिनिधित्व देने पर भी इस समाज के वोट नहीं मिले। इन हालात में अब पार्टी अगले चुनावों में मुस्लिम समाज के उम्मीदवारों को सोच-समझ कर मौका देगी, ताकि पार्टी को नुकसान न पहुंचे।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल।
- फोटो : अमर उजाला।
बसपा सरकार में कई विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी रविवार को अपने समर्थकों समेत सपा में शामिल हो गए। उनके साथ ही पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू ने भी सपा का दामन थाम लिया। सपा अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी में ज्वाइनिंग दी। नसीमुद्दीन के कांग्रेस छोड़कर सपा में आने पर अखिलेश ने कहा कि उन्होंने सिर्फ मकान बदला है, मोहल्ला नहीं। यानी अभी भी इंडिया गठबंधन में ही हैं। इसके अलावा कई अन्य प्रमुख नेता भी सपा में हुए।
शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में देवरिया के पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा, प्रतापगढ़ सदर के पूर्व विधायक राजकुमार पाल, कन्नौज से एआईएमआईएम के प्रत्याशी रहे डॉ. दानिश खान, पूर्व विधान परिषद सदस्य हुस्ना सिद्दीकी, पूनम पाल और पहली ड्रोन पायलट रंजना पाल भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुईं। इस अवसर पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि 15 हजार 7 सौ 18 लोग विभिन्न दलों को छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। सपा मजबूत होगी तो हम सब मजबूत होंगे। हमारा लक्ष्य 2027 में उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनाना है।
अखिलेश यादव ने कहा कि फूल बाबू के आने से बहुतों के फूल मुरझा गए हैं। जो नेता शामिल हुए हैं, उनके राजनीतिक सम्मान का पूरा ख्याल रखा जाएगा। इन नेताओं के चुनाव लड़ने की बात भी कही। होली मिलन से पहले यह पीडीए होली मिलन हो रहा है। यहां बता दें कि फूल बाबू भी बसपा सरकार में मंत्री रहे थे।