फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

DGP ने NCRB रिपोर्ट खारिज की, कहा- आबादी के अनुपात में देखें, यूपी में घट गया अपराध

Tue, 05 Dec 2017 08:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
डीजीपी सुलखान सिंह - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो की रिपोर्ट में प्रदेश में अपराध बढ़ने की बात को डीजीपी सुलखान सिंह ने खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि आबादी के अनुपात में देखा जाए तो प्रदेश अपराध के मामले में देश में 26वें नंबर पर है।
विज्ञापन


पुलिस मुख्यालय में सोमवार को डीजीपी सुलखान सिंह ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो ने 2016 की रिपोर्ट पेश की है। इसमें कहा गया है देश में आईपीसी के तहत कुल 29 लाख 75711 मुकदमे दर्ज हुए। इसमें यूपी में 282171 (9.5 फीसदी) मुकदमे हैं। उत्तर प्रदेश की आबादी लगभग 22 करोड़ है। यदि प्रति लाख पर यह आंकड़े निकाले जाएं तो उत्तर प्रदेश सभी प्रमुख राज्यों को पीछे छोड़ चुका है। डीजीपी ने कहा कि यह आंकड़े पिछले साल के हैं इसलिए मैं इसका क्रेडिट नहीं ले रहा।

डीजीपी ने कहा कि हत्या की घटनाओं से अपराध आंका जाता है। प्रदेश की 22 करोड़ की आबादी में 4889 हत्याएं हुईं जबकि, पौने तीन करोड़ की आबादी वाले हरियाणा में 1057 हत्याएं और 12 करोड़ की आबादी वाले महाराष्ट्र में 2016 में 2299 हत्या की घटना हुईं। आबादी के अनुपात में देखा जाए तो उत्तर प्रदेश 21वें नंबर पर है। डीजीपी की मानें तो महिलाओं के प्रति अपराध में यूपी 17वें नंबर पर है।
विज्ञापन

2017 में अपराध घटने का दावा

डीजीपी ने कहा कि 2017 में प्रदेश में अपराध घटा है। 15 नवंबर तक के आंकड़े के अनुसार पिछले वर्ष रोज 13.39 हत्याएं होती थीं लेकिन इस वर्ष प्रतिदिन 12 हत्या दर्ज हो रही हैं। डकैती और सेंधमारी की घटनाएं भी घटी हैं। पिछले वर्ष रोज 135 महिलाओं के साथ घटना होती थी जबकि इस वर्ष 145 महिलाओं के साथ आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। डीजीपी ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराध के आंकड़े बढ़ने की वजह सभी केस दर्ज होना है।

तारिक की हत्या गैंगवार नहीं
डीजीपी ने राजधानी में ठेकेदार तारिक के बारे में कहा कि यह गैंगवार नहीं है। क्रिमनल गैेंग का मामला है, तारिक भी एक अपराधी था। जांच में कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं।

‘नीली बत्ती लगाने वाले कम पढ़े-लिखे अधिकारी’
पुलिस की गाड़ियों पर नीली बत्ती लगाने के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि सभी जिलों में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। उन्होंने तंज कसा कि लगता है कुछ अधिकारी कम पढ़े लिखे हैं, जो निर्देशों को नहीं पढ़ पा रहे हैं। ट्रैफिक विभाग से कहा गया है कि वह गाड़ियों से नीली बत्तियां उतरवाए।
विज्ञापन

पुलिस पर हमले की घटनाओं पर डीजीपी गंभीर, सख्त कार्रवाई के निर्देश

- फोटो : amar ujala
पिछले कुछ समय में हुई पुलिस कर्मियों पर हमले की घटनाओं को डीजीपी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि पुलिस किसी भी दबिश में पूरी तैयारी के साथ जाए। पुलिस टीम पर कोई हमला करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

सोमवार को मीडिया से बातचीत में डीजीपी सुलखान सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में पुलिस के साथ जो भी घटनाएं हुई हैं, उनमें शामिल लोगों को चिह्नित करके उन पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। गाजियाबाद में एनआईए, यूपी एटीएस और मेरठ पुलिस पर हमले के बारे में डीजीपी ने कहा, पुलिस की चूक की वजह से यह घटना हुई। बिना पूरी तैयारी के टीम मौके पर पहुंची और अपराधी के साथियों ने प्रतिरोध कर दिया जिसकी वजह से घटना हुई।

 डीजीपी ने कहा, पुलिस के साथ हर घटना को हमले का नाम देना ठीक नहीं है। किसी अपराधी को पकड़ने गई पुलिस पर हमला कर देना प्रतिरोध या पुलिस की भाषा में मुजाहमत कहलाता है। जबकि मुठभेड़ में पुलिस और बदमाश आमने-सामने होते हैं और पुलिस कर्मियों के  साथ घटना होने का रिस्क बना रहता है। पुलिस पर हमला वही कहलाता है जिसमें घात लगाकर हमला किया जाए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें