एडीजी रेलवे वीके मौर्य ने कहा कि यूपी के 1190 रेलवे स्टेशनों से 1597 ट्रेनें रोजाना गुजरती हैं। इन ट्रेनों में 15 लाख यात्री सफर करते हैं। पिछले सवा साल में लगभग 5100 से अधिक बच्चे लावारिस हालत में ट्रेनों में या स्टेशनों पर मिले हैं। इन बच्चों को रेलवे चाइल्ड लाइन और अन्य एनजीओ के माध्यम से रेस्क्यू किया गया है।
14 साल की उम्र पूरी करते ही स्टेशनों से लापता हो जाती हैं लड़कियां
एहसास एनजीओ की संचालिका शचि सिंह ने बताया कि बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं जिनका घर-द्वार रेलवे स्टेशन ही होता है। ऐसे बच्चे पहले भीख मांगते हैं और फिर आपराधिक घटनाओं में शामिल हो जाते हैं। ऐसी लड़कियां जो आठ से 10 साल की उम्र में स्टेशन पर आती हैं, वे 14 साल की उम्र पूरी होते ही गायब हो जाती हैं।
चेतना संस्था के संजय गुप्ता के साथ ही साथी संस्था के लोगों ने भी अपने काम और जिम्मेदारियों के बारे में बताया। आईआरसीटीसी के रीजनल हेड अश्वनी श्रीवास्तव ने इसे अच्छी पहल बताया और उम्मीद जाहिर की कि आने वाले दिनों में इसका असर दिखेगा।