एसटीएफ पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही
एसटीएफ पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही हैं। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल था और अब तक कितने फर्जी फास्टैग जारी किए गए। साथ ही बैंक से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और सरकार को हुए वास्तविक राजस्व नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।
पांच हजार में एक फर्जी फास्टैग
पूछताछ में नकीब खान ने एसटीएफ को बताया कि वर्ष 2022 में अनंत राम राठौर ने उसे इंडसइंड बैंक का एजेंट बनवाया था। शुरुआत में उसे बैंक के पोर्टल पर सामान्य तरीके से फास्टैग बनाने का काम सिखाया गया। बाद में अधिक कमाई का लालच देकर फर्जी दस्तावेजों और वाहन नंबरों के आधार पर फास्टैग जारी कराने का खेल शुरू कराया गया।
आरोपी ने स्वीकार किया कि एक फर्जी फास्टैग बनाने के बदले उसे पांच हजार रुपये मिले थे। इसके बाद दोनों ने मिलकर कई अन्य वाहनों के लिए भी इसी तरह फर्जी फास्टैग जारी किए और कमीशन की रकम आपस में बांटते रहे।
पूरा खेल समझिए
एसटीएफ के मुताबिक गिरोह पहले बैंक के अधिकृत एजेंट के रूप में काम करता था। इसके बाद वाहन मालिकों के ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल नंबर और अन्य दस्तावेज लेकर बैंक के पोर्टल पर फास्टैग बनाता था। बाद में फर्जी आरसी और फर्जी वाहन नंबर अपलोड कर दूसरे वाहनों के लिए भी फास्टैग जारी किए जाने लगे। एक वाहन के लिए जारी फास्टैग का इस्तेमाल दूसरे वाहन पर कराया जाता था, जिससे टोल प्लाजा पर वास्तविक वाहन की पहचान नहीं हो पाती थी और टोल टैक्स की चोरी होती थी।