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UP : सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए थानों में क्रिटिकल टीम का गठन, अब दुर्घटनाओं की जांच का भी होगा जिम्मा

Wed, 05 Nov 2025 09:57 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

पुलिस की टीम ने दो माह में किए गए प्रयोग किए, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। दुर्घटना के हॉटस्पॉट की पहचान, रोड इंजीनियरिंग, सड़क के अवरोधों आदि वजहों का पता लगाने के साथ उनका निराकरण कराया गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रदेश में दुर्घटना बाहुल्य इलाकों से संबंधित 233 थानों को चिह्नित कर स्पेशल क्रिटिकल टीम का गठन किया गया है। ये टीमें अपने क्षेत्र के दुर्घटना बाहुल्य इलाकों में सड़क सुरक्षा के उपायों को लागू कराने के साथ हादसों की जांच भी करेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश में सड़क हादसों में होने वाली जनहानि को कम करने के निर्देश के बाद डीजीपी राजीव कृष्ण ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल करते हुए पायलट प्रोजेक्ट शुरू कराया था। इसकी सफलता के बाद सभी संबंधित थानों में इन टीमों का गठन किया गया है।

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बीते दिनों सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर में 100 दुर्घटना बाहुल्य जिलों को चिह्नित किया था, जिसमें यूपी के भी 20 जिले शामिल हैं। इन जिलों में 89 क्रिटिकल कॉरिडोर और 3233 क्रिटिकल पॉइंट चिह्नित किए गए हैं। डीजीपी ने बताया कि बीते दो माह के दौरान इन जिलों में चिह्नित जिन इलाकों में अधिक हादसे होते हैं, वहां एडीजी, डीआईजी और एसपी रैंक के अधिकारियों को भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराया गया, जिसके बाद हादसों पर अंकुश लगाने की वृहद कार्ययोजना तैयार की गई। 

इसी कार्ययोजना के तहत संबंधित थानों में एक उपनिरीक्षक और चार आरक्षियों की डेडिकेटेड स्पेशल क्रिटिकल टीम का गठन किया गया है, जिसका काम हादसों की रोकथाम के लिए सुझाव देना, जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति को हादसे की वजहों के बारे में सूचित करना और हादसों की जांच करना है। सड़क हादसों की जांच के तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखकर टीम को विशेष प्रशिक्षण भी दिलाने की तैयारी है।
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सकारात्मक परिणाम मिले
डीजीपी ने बताया कि चिह्नित दुर्घटना बाहुल्य मार्गों पर बीते दो माह में किए गए प्रयोगों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इसके तहत दुर्घटना के हॉटस्पॉट की पहचान, रोड इंजीनियरिंग, सड़क के अवरोधों, दृश्यता, जनशक्ति, स्वास्थ्य संसाधनों, हेल्पलाइन आदि वजहों का पता लगाने के साथ उनका निराकरण कराया गया। ये क्रिटिकल कॉरिडोर 10-15 किलोमीटर से लेकर 50-60 किलोमीटर तक फैले हुए हैं। डीजीपी ने कहा कि अगले चरण में शहरों को जाममुक्त करने की कवायद की जाएगी।

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