सीएजी ने 16 मामलों में 13.71 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति
सीएजी ने 16 मामलों में 13.71 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति और 34 कार्यों में 1.63 करोड़ रुपये के गुणवत्ता परीक्षण शुल्क की वसूली न किए जाने को भी गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है। रिपोर्ट में कम क्षमता वाले ठेकेदारों को उच्च क्षमता के कार्य सौंपे जाने का भी उल्लेख है।
भूमि आवंटन में भी नियमों की अनदेखी सामने आई है। मथुरा औद्योगिक क्षेत्र-बी में 3929 वर्गमीटर भूखंड का 93.08 लाख रुपये में आवंटन आवेदन और साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी किए बिना कर दिया गया। वहीं कानपुर देहात के जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र में 5018.65 वर्गमीटर का भूखंड अपात्र आवेदक मेसर्स जय भगवती ट्रेडर्स को 1.10 करोड़ रुपये में आवंटित कर दिया गया, जबकि मूल्यांकन के आधार पर यह भूखंड आईआरसीटीसी को दिया जाना चाहिए था। सीएजी की रिपोर्ट ने यूपीसीडा की आंतरिक निगरानी और जवाबदेही प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।