जल निगम में ठेकेदार अब सिर्फ मनपसंद काम नहीं ले सकेंगे। लगातार तीन टेंडर में भाग न लेने वाले वे ब्लैकलिस्ट किए जाएंगे। सरकार ने यह फैसला तमाम ठेकेदारों के लगातार कई टेंडरों में भाग नहीं लेने की वजह से निगम की परियोजनाओं को समय से पूरा करने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए किया है। बार-बार टेंडर आमंत्रित करने के बाद भी इसकी प्रक्रिया में शामिल नहीं होने वाले ठेेकेदारों की सूची तैयार करने का काम शुरू हो चुका है।
जल निगम में सैकड़ों की संख्या में ठेकेदार पंजीकृत हैं। मगर वे टेंडर की प्रक्रिया में तब तक शामिल नहीं होते हैं, जब तक उनकी मनपंसद काम का टेंडर नहीं निकलता है। ऐसे में कई बार एक ही काम के लिए कई बार टेंडर निकालना पड़ता है। इसके बावजूद ठेकेदार टेंडर में शामिल नहीं होते हैं। नतीजतन टेंडर प्रक्रिया में इतना वक्त निकल जाता है कि परियोजना को समय से पूरा करना मुश्किल होता है। ऐसे में जहां परियोजना की लागत बढ़ जाती है, वहीं टेंडर में कड़ी प्रतिस्पर्धा नहीं होने से निर्धारित शिड्यूल दर से अधिक दर पर टेंडर को मंजूरी देनी पड़ती है। पिछले दिनों शासन स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में यह मुद्दा उठा था। इस पर उच्चाधिकारियों ने नाराजगी जताते हुए जल निगम के प्रबंध निदेशक को ठेकेदारों की इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। इसी कड़ी में जल निगम प्रबंधन ने अब लगातार तीन टेंडर में भाग न लेने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का फैसला किया है।
मुख्य सचिव के निर्देश के बाद से जल निगम में प्रदेश भर के ऐसे ठेकेदारों की सूची तैयार हो रही है, जो लगातार कई बार टेंडर की प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए है। विभागीय सूत्र ने बताया कि शासन के निर्देश के मुताबिक सूची फाइनल होने वाली है। इसके बाद ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
नियमित टेंडर डालने वाले ठेकेदारों को ही मिलेगा काम
जल निगम में नियमित टेंडर डालने वाले ठेकेदारों का ही काम मिलेगा। इसके मद्देनजर टेंडर में भाग लेने वाले और भाग न लेने वाले दोनों तरह के ठेकेदारों की अलग-अलग सूची तैयार की जा रही है।