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UP: पांच राज्यों के चुनाव अकेले दम पर लड़ना बसपा के लिए चुनौती, इन जगहों पर कुछ सीट जीतने की उम्मीद

Sat, 21 Mar 2026 07:34 AM IST
Akash Dwivedi अशोक मिश्रा, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

पांच राज्यों के चुनाव अकेले लड़ना बसपा के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी कुछ क्षेत्रों में सीमित सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच उसे मजबूत रणनीति और संगठनात्मक पकड़ के जरिए अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने की जरूरत होगी।
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मायावती - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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बहुजन समाज पार्टी पांच राज्यों तामिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी में है। पार्टी असम और पुडुचेरी को छोड़कर बाकी तीन राज्यों में अपने प्रत्याशी उतारेगी। हालांकि इन राज्यों में अकेले दम पर चुनाव लड़ना उसके लिए चुनौती साबित होगा। बसपा बीते कई महीनों से पश्चिम बंगाल और केरल में अपने संगठन को धार देने में जुटी है। वहीं तामिलनाडु में बसपा संगठन पहले से मजबूत है।

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 केरल में नेशनल कोआर्डिनेटर अशोक सिद्धार्थ, जयप्रकाश सिंह समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को चुनाव की तैयारियां करने की जिम्मेदारी सौंपी है। बसपा ने बीते वर्ष दिसंबर माह में केरल में निकाय चुनाव में कई सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिससे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ा है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीती 22 फरवरी को इन राज्यों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनाव की तैयारियों में जुटने को कहा था, जिसकी रिपोर्ट जल्द लेने की तैयारी है। 

वहीं तामिलनाडु में बसपा ने बीते कुछ वर्षों में संगठन की जड़ें मजबूत हुई हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे के. आर्मस्ट्रांग की हत्या के बाद मायावती और आकाश आनंद ने तामिलनाडु जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की थी। पार्टी ने इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ दल पर जबरदस्त हमला भी बोला था, जिससे खासकर दलितों में पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ी थी। साथ ही बसपा की डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम की नीतियों वाली एकमात्र पार्टी के रूप में पहचान स्थापित हुई थी।

बंगाल में कर सकती है खेला

पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा चुनाव में मुकाबला चुनौती भरा होने वाला है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच होने वाले मुकाबले में बसपा बड़ा उलटफेर कर सकती है। पार्टी ने पश्चिम बंगाल में बूथ लेवल तक संगठन को मजबूत किया है। 

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वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने हाल ही में राष्ट्रपति के अपमान पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला भी बोला है। बसपा अगर दलितों के साथ मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब होती है तो इसका नुकसान तृणमूल कांग्रेस को हो सकता है।

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