लगातार चली गवाही से आया फैसला
अभियोजन की ओर से सबसे पहले घटना की चश्मदीद सना की गवाही हुई। सना को चार अप्रैल 2019 को अदालत के समक्ष गवाही के लिए पेश किया गया। सना की गवाही चार अप्रैल 2019 से 24 अक्तूबर 2019 तक चली। इसके बाद कल्पना तिवारी को दो नवंबर 2019 को गवाही के लिए बुलाया गया।
कल्पना ने लगातार तीन नवंबर, 14 नवंबर और 15 नवंबर को गवाही दी। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने वाले हेड कांस्टेबल राजेश कुमार को 28 नवंबर 2019 को पेश किया गया। इसके बाद छह जनवरी 2020 को शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव कोर्ट में पेश हुए।
मजिस्टिरियल जांच करने वाले मजिस्ट्रेट ने भी दिया था बयान
11 फरवरी 2020 को झांसी में नियुक्त तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सलिल कुमार पटेल का बयान भी दर्ज किया गया। इसके बाद उन्हें 13 मार्च 2020 को भी बयान के लिए बुलाया गया। सिटी मजिस्ट्रेट का बयान दर्ज करने के बाद सना का बयान लेने वाले डॉक्टर राम प्रकाश द्विवेदी को पेश हुए, जिनकी गवाही 21 जनवरी 2021 एवं 23 सितंबर 2021 को हुई।
पत्रावली के अनुसार इसी क्रम में आयोजन साक्षी के रूप में पंचायत नामा करने वाले उप निरीक्षक कौशल कुमार तिवारी को भी पेश किया गया। इन्होंने पंचायत नामा तैयार किया था। अंतिम साक्षी विवेचक व तत्कालीन थानाध्यक्ष महानगर विकास कुमार पांडे को पेश किया गया।
इनकी गवाही और बचाव पक्ष की लंबी जिरह के कारण दो फरवरी 2024 से 19 अक्तूबर 2024 तक हुई। अभियोजन साक्ष्य समाप्त होने के बाद दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत दोनों आरोपियों का कोर्ट ने 26 नवंबर 2024 को विस्तृत बयान दर्ज किए।