आईएम के शीर्ष कमांडर यासीन भटकल की गिरफ्तारी के साथ ही उत्तर प्रदेश में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) द्वारा की गई विभिन्न वारदातों के खुलासा होने की उम्मीद है। साथ ही सूबे में आईएम के नेटवर्क का भी खुलासा हो सकता है।
यहां की जांच एजेंसियां भी मानती हैं कि यासीन का नाम भले ही पहली बार 2008 में चर्चा में आया लेकिन वह इससे काफी पहले से आईएम के लिए काम कर रहा था।
गौरतलब है कि दिल्ली क्राइम ब्रांच ने वर्ष 2012 में उन्नाव निवासी बशीर को गिरफ्तार किया था। बशीर ने पूछताछ में बताया था कि वह आईएम का सक्रिय सदस्य है और उसने बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में वांछितों के यूपी से बाहर भाग निकलने में मदद की थी।
उसने यह भी बताया था कि वर्ष 2006 में यासीन उसके पास उन्नाव आया था और कुछ दिन रुका भी था। पूछताछ में यह भी सामने आया था कि यूपी में आईएम के अन्य सदस्यों से यासीन लगातार संपर्क में था।
वे सभी यासीन के इशारे पर काम करते थे लेकिन बशीर संगठन के अन्य सदस्यों के नाम नहीं बता सका था। यही नहीं वर्ष 2007 में आजमगढ़ से पकड़ा गया मुफ्ती बशीर ने पूछताछ में बताया था कि बशीर यासीन से सीधे संपर्क में था।
बशीर पूर्वी उत्तर प्रदेश में आईएम सदस्यों में समन्वय रखता था। एटीएस का मानना है कि यासीन से पूछताछ में यूपी में छिपे आईएम के आतंकियों व संगठन द्वारा की गई घटनाओं के बारे काफी कुछ जानकारी सामने आ सकेगी।
सूबे में आईएम की प्रमुख वारदातों में नवंबर 2007 का लखनऊ, फैजाबाद व वाराणसी कचहरी सीरियल ब्लास्ट, 2007 में गोरखपुर का गोलघर विस्फोट और 2010 का वाराणसी का शीतला घाट विस्फोट है।
आईएम का नाम वाराणसी के दशाश्वमेघ घाट विस्फोट में भी आया था। उस समय भी यासीन भटकल के बारे में चर्चा सामने आई थी लेकिन तब जांच एजेंसियों को इसके पुख्ता साक्ष्य नहीं मिल सके थे।
इसके बाद जौनपुर में 2005 में श्रमजीवी एक्सप्रेस और 2006 में वाराणसी के संकट मोचन में हुए विस्फोट के पीछे भी आईएम का हाथ होने की बात सामने आई थी।
गौरतलब है उस समय हूजी, लश्कर व सिमी जैसे संगठनों की सक्रियता अधिक थी। जांच एजेंसियों ने वाराणसी संकट मोचन के पीछे हूजी का भी हाथ माना था।
हालांकि आजमगढ़ से मुफ्ती बशीर की गिरफ्तारी के बाद यह खुलासा हुआ था कि सूबे में इंडियन मुजाहिदीन नाम का संगठन सक्रिय है और यह लश्कर का एक तरह का फ्रंटल संगठन है, जिसमें सिमी के हार्डकोर मेंबर भी शामिल हैं।