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UP: जून में 10% अधिभार वसूली मामले में आयोग का बड़ा फैसला, बोला- 14 माह से हो रही गलत वसूली, आगे न करें

Tue, 23 Jun 2026 09:20 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

विद्युत नियामक आयोग ने जून माह में लगाए गए 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार की गणना को गलत माना है। आयोग ने बिजली कंपनियों को भविष्य में यह तरीका न अपनाने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता परिषद ने दावा किया कि पिछले 14 महीनों से गलत वसूली हो रही थी और राहत की मांग की है।
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बिजली बिल बढ़ेगा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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विद्युत उपभोक्ताओं से ईंधन अधिभार वसूली मामले में नया मोड़ आ गया है। जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार वसूली मामले में अप्रैल 2025 से जिस फार्मूले से वसूली हो रही है, उसे नियामक आयोग ने गलत ठहरा दिया। यह भी आदेश दिया कि अब आगे इस फार्मूले से गलत वसूली न करें।

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राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में याचिका लगाकर जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार गलत तरीके से वसूलने का आरोप लगाया। नियामक आयोग ने सुनवाई करते हुए पावर कार्पोरेशन से ईंधन अधिभार गणना के सभी दस्तावेज तलब किए। 

विद्युत नियामक आयोग द्वारा उठाए गए सवालों पर पावर कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक की ओर से 19 जून को जवाब दाखिल किया गया। इसमें कार्पोरेशन ने बताया कि अप्रैल 2025 से पूरे प्रदेश में विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीसीए) की वसूली एक विशेष फार्मूले के आधार पर की जा रही है। उसी फार्मूले के तहत जून 2026 माह में भी अधिभार तय किया गया है। मंगलवार को नियामक आयोग की द्विसदस्यीय पीठ ने पूरे मामले में अपना फैसला सुनाया। 
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आयोग ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा अब तक की गई एफपीपीसीए गणना पूरी तरह गलत है। एफपीपीसीए की मासिक गणना केवल उसी माह की वास्तविक विद्युत क्रय लागत तथा ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर की जाएगी। किसी अन्य माह की देनदारी या समायोजन को एफपीपीसीए में शामिल नहीं किया जा सकता। 

आयोग ने यह भी कहा कि पावर कॉरपोरेशन आगे इस प्रकार की गलती ना करें। कानून की परिधि में रहकर ही कार्य करें। आयोग ने अपने फैसले में पावर कारपोरेशन को कड़ी फटकार भी लगाई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यदि 14 माह से गलत तरीके से वसूली की जा रही है तो उसकी भरपाई उपभोक्ताओं को कैसे की जाएगी?

 




 

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जून ही नहीं पूरे 14 माह का होगा हिसाब

ईंधन अधिभार मामले में नियामक आयोग के फैसले के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं को हर हाल में राहत दिलाई जाएगी। अब सिर्फ जून ही नहीं बल्कि 14 माह का हिसाब होगा।  नियामक आयोग के अध्यक्ष से मिलकर मांग की जाएगी कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पूरी गणना की समीक्षा करें और नए सिरे से आदेश जारी करें।

क्योंकि आयोग ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि पावर कार्पोरेशन सिर्फ जून माह में ही नहीं बल्कि 14 माह से गलत तरीके से उपभोक्ताओं से ईंधन अधिभार वसूल रहा है। उपभोक्ता परिषद जल्द ही आयोग में पुन याचिका लगाएगी। गलत तरीके से हुई वसूली उपभोक्ताओं के बिल में समायोजित कराया जाएगा। 

आयोग से मांग की जाएगी कि पूरे 14 माह की नए सिरे से समीक्षा की जाए और उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। प्रदेश सरकार से भी अपील की जाएगी। गलत गणना के लिए पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन और ऊर्जा विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की भी मांग की जाएगी। 

यदि संबंधित अधिकारियों को एफपीपीसीए लागू करने की सही प्रक्रिया और फार्मूले का ज्ञान नहीं था, तो प्रदेश की जनता पर गलत वित्तीय भार क्यों डाला गया ? इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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