विरासत को कोसना ही राहुल गांधी का काम
सीएम योगी ने कहा कि राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली है, लेकिन इसके बावजूद वह भारत की परंपरा व विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। राहुल यूपी से बाहर जाकर उत्तर प्रदेश को लांछित और अपमानित करते हैं और भारत से बाहर जाकर देश का अपमान करते हैं।
सेना सीमाओं पर दुश्मनों से लड़ती है, लेकिन राहुल जवानों से प्रमाण मांगते हैं। कांग्रेस तो अयोध्या में प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा करती रही है। बच्चों व नौजवानों को ऐसी दिशा में नहीं ले जाना चाहिए।
भारत की वर्तमान पीढ़ी के भविष्य से खिलवाड़ न करें
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी पर अर्बन नक्सलियों के हाथों वर्तमान पीढ़ी का भविष्य खराब करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि वह भारत की विरासत को क्यों बर्बाद करना चाहते हैं? क्यों देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं? देश ने राहुल गांधी से नेता प्रतिपक्ष के रूप में सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका की अपेक्षा की थी, लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से स्वयं को पूरी तरह अलग कर लिया है। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र के प्रति कांग्रेस की निष्ठा पर भी सवाल उठाते हुए 1975 के आपातकाल का उल्लेख किया।
अमेठी-रायबरेली के सामने बनाया पहचान का संकट
मुख्यमंत्री ने गांधी परिवार के राजनीतिक प्रभाव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेठी व रायबरेली ने लंबे समय तक इस परिवार को ढोया, लेकिन इस क्षेत्र के सामने पहचान का संकट भी इसी परिवार ने खड़ा किया। अब जनता को तय करना है कि विकास के लिए किस प्रकार की राजनीति और नेतृत्व की आवश्यकता है।
एक ही परिवार का नाम बढ़ाती रही कांग्रेस
सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस को देश के स्मारकों और संस्थानों का नामकरण एक ही परिवार के नाम पर करने में रुचि रही है। उसने राना बेनी माधव बख्श सिंह, लालचंद स्वर्णकार और महापराक्रमी वीर पासी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर संस्थानों व स्मारकों के नाम रखने के बारे में कभी नहीं सोचा। देश के वास्तविक नायकों को उचित सम्मान देना कांग्रेस की प्राथमिकता नहीं रही। काकोरी ट्रेन एक्शन को लूट कहकर कांग्रेस वर्षों तक हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करती रही।
सचिंद्र नाथ बख्शी को जेल भिजवाने वाला कांग्रेस नेता
मुख्यमंत्री ने काकोरी ट्रेन एक्शन के क्रांतिकारी सचिंद्र नाथ बख्शी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। आजादी के बाद उन्हें मुक्त किया गया। बाद में वह भारतीय जनसंघ से जुड़े और वाराणसी दक्षिण से विधायक बने। सचिंद्र नाथ बख्शी ने विधानसभा में बताया था कि उनके खिलाफ पैरवी करने वाला एक कांग्रेस नेता था, जिसने अंग्रेजों की मुखबिरी कर उन्हें जेल भिजवाने में भूमिका निभाई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने ऐसे व्यक्ति के नाम पर लखनऊ में सड़क का नामकरण किया, जबकि सचिंद्र नाथ बख्शी जैसे क्रांतिकारी को भुला दिया।