मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
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मुख्यमंत्री योगी ने सपा के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में अपराधी समानांतर सरकार चला रहे थे। माफिया खुला घूमते थे। न तो बेटियां सुरक्षित थीं और न ही व्यापारी। पर अब यूपी उपद्रव नहीं उत्सव का प्रदेश है। अब प्रदेश में दंगों की जगह टेम्पल इकानॉमी विकसित हो रही है। 2017 के पहले के कुंभ में 12 करोड़ लोग आए थे पर इस बार माघ मेले में ही प्रयागराज में 21 करोड़ लोग स्नान करने आए। ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि लोगों में कानून व्यवस्था को लेकर लोगों का विश्वास जागा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र (2026-27) में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रवाद, कानून-व्यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और विकास के मुद्दों पर विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वंदे मातरम का विरोध करने वालों को भारत की धरती पर रहने का कोई हक नहीं है और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रदेश की आस्था और विकास दोनों को बाधित किया।
सीएम योगी ने कहा कि सपा-कांग्रेस के लोग वंदे मातरम का विरोध करते हैं, जबकि यह राष्ट्र की अस्मिता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि जो लोग “हिंदुस्तान की खाएंगे, लेकिन वंदे मातरम नहीं गाएंगे”, उन्हें यहां रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए। सीएम ने आरोप लगाया कि तुष्टिकरण की नीति के कारण सपा सरकारें अयोध्या और मथुरा के विकास का विरोध करती रहीं। कांवड़ यात्रा रोकी जाती थी, और दीपोत्सव का विरोध किया गया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की आस्था का केंद्र है और विरासत के साथ विकास ही पुनर्जागरण है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में दंगों की जगह “टेम्पल इकोनॉमी” विकसित हो रही है। प्रयागराज में आयोजित माघ मेले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले कुंभ में 12 करोड़ लोग आए थे, जबकि इस बार माघ मेले में ही 21 करोड़ श्रद्धालु स्नान करने पहुंचे। यह कानून-व्यवस्था पर जनता के बढ़े विश्वास का परिणाम है।
मुख्यमंत्री योगी ने 2017 से पहले के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय अपराधी समानांतर सरकार चला रहे थे, माफिया खुलेआम घूमते थे, बेटियां और व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। अब यूपी उपद्रव नहीं, उत्सव का प्रदेश है। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों की यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की, कर्फ्यू से कानून के राज की, उपद्रव से उत्सव की, समस्या से समाधान की और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। आज यूपी बीमारू राज्य नहीं, बल्कि देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है और विकास का इंजन बनकर आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आधुनिक फॉरेंसिक साइंस सिस्टम लागू किया गया है। पहले जहां दो-तीन फॉरेंसिक लैब थीं, अब 12 प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं और लखनऊ में स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई है। हर जिले में साइबर थाना और प्रत्येक थाने में साइबर डेस्क बनाई गई है। उन्होंने बताया कि 60,244 पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है और प्रशिक्षण क्षमता में भी व्यापक विस्तार हुआ है। पीएसी का पुनर्गठन किया गया है, तीन महिला पीएसी वाहिनियां गठित की गई हैं और तीन और गठित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था। इसके बावजूद विपक्ष का व्यवहार न केवल संवैधानिक प्रमुख का, बल्कि मातृशक्ति का भी अपमान था। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि सनातन की बात करने वालों को अपने से बड़ी महिला के प्रति सम्मानजनक आचरण करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार पिछले आठ वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों को राशन, स्वास्थ्य और अन्य योजनाओं का लाभ यथावत मिलता रहेगा। सदन में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सरकार सत्ता की होड़ में नहीं, बल्कि सुशासन, स्पष्ट नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रही है।
सपा शासनकाल में हुई वाराणसी की पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रश्न उठाया कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे, तो उन पर लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों हुई? नैतिकता की बात करने वालों को पहले परंपरा और व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। माघ मेला में मौनी अमावस्या के अवसर पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अवसरों पर कड़ी व्यवस्था लागू करनी होती है। प्रवेश और निकास मार्ग निर्धारित होते हैं और उनका पालन सभी के लिए अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी भगदड़ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है, जिससे श्रद्धालुओं की जान खतरे में पड़ सकती है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कानून सबके लिए समान है। मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है और मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति कभी इस प्रकार का आचरण नहीं कर सकता। हम मर्यादित लोग हैं, कानून के शासन पर विश्वास करते हैं। कानून के शासन का पालन करना भी जानते हैं, पालन करवाना भी जानते हैं। दोनों चीजों को एक साथ लागू करवाना जानते हैं, लेकिन इसके नाम पर गुमराह करना बंद करिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश की चारों दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की थी, उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिकापुरी। इन चारों पीठों की अपनी-अपनी परंपरा, दायित्व और आध्यात्मिक आधार हैं। इन पीठों से चार वेद जुड़े हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। प्रत्येक वेद का अपना महावाक्य है- “प्रज्ञानं ब्रह्म”, “अहम् ब्रह्मास्मि”, “तत्त्वमसि” और “अयमात्मा ब्रह्म”। ये महावाक्य भारतीय दर्शन की आत्मा हैं और साधना की उच्चतम अवस्था का बोध कराते हैं। मैं ही ब्रह्म हूं, कोई भी साधक जब अपनी साधना की पराकाष्ठा में पहुंचता है तो उसको इस बात की अनुभूति होती है। यही उपनिषदों का उद्घोष भी है।
सीएम योगी ने सपा नेताओं पर कटाक्ष किया कि वे माफिया की कब्र पर फातिहा पढ़ने जाते हैं, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन धाम के विकास का विरोध करते हैं। सपा शासन में तुष्टिकरण की पराकाष्ठा की गई। सपा ने कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी पर्व को थाने-जेल में मनाने और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा को रोक दिया था। दीपोत्सव का विरोध किया। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में एफिडेविट दिया कि श्रीराम-श्रीकृष्ण मिथक थे। सपा रामभक्तों पर गोलियां चलवाती है। मंदिर निर्माण को रोकने के लिए कोर्ट में वकील खड़ा करती है। सीएम ने सपाइयों को चेताते हुए कहा कि सनातन आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता है। आज अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन गया है। पुनर्जागरण के इस मॉडल में विरासत भी है और विकास भी।