मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोडिन कफ सिरप (नकली दवा) के कारण मौत की कोई भी बात शासन के संज्ञान में नहीं आयी है। समय-समय पर एफएसडीए विभाग लगातार छापेमारी व कार्रवाई करती है। कंपनियों में भी इस प्रकार की कार्रवाई होती है। यूपी में कोडिन कफ सिरप के केवल स्टाकिस्ट व होलसेलर हैं। इसका यहां प्रोडक्शन नहीं होता। इसका प्रोडक्शन मध्य प्रदेश, हिमाचल व अन्य राज्यों में होता है। मौत के जो प्रकरण आए हैं, वह भी अन्य राज्यों के हैं। ऐसे प्रकरण तमिलनाडु में बने सिरप के कारण आए हैं। यह पूरा प्रकरण इललीगल डायवर्जन का है। इसके माध्यम से होलसेलर (सहारनपुर, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी) ने इसे उन देशों व राज्यों में पहुंचाया है, जहां मद्य निषेध है। वहां नशे के आदी लोगों को इसे लेने की आदत है। वहां इसका दुरुपयोग किया गया है।