पश्चिमी यूपी में रालोद के दलित कार्ड पर अनिल कुमार मंत्री बने हैं। अनिल कुमार तीसरी बार विधायक चुने गए थे। वहीं, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को आखिरकार होली से पहले राजपाट मिल ही गया है।
राष्ट्रीय लोकदल ने पश्चिमी यूपी में दलित कार्ड खेलकर पुरकाजी से विधायक अनिल कुमार को मंत्री बनाया है। रालोद ने लोकसभा चुनाव में बिजनौर और बागपत सीट पर पिछड़े वर्ग के उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं विधान परिषद में भी जाट समाज के प्रत्याशी को टिकट दिया है।
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पश्चिमी यूपी में जाटव वोट बैंक को साधने के लिए अनिल कुमार को मंत्री पद दिया है। अनिल कुमार ने अपने ननिहाल कसियारा से बसपा में शामिल होकर राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 2007 में पहली बार चरथावल से विधायक चुने गए। वर्ष 2012 में परिसीमन के बाद सुरक्षित सीट पुरकाजी बनाई गई।
बसपा के टिकट पर अनिल कुमार ने पुरकाजी से विधायक निर्वाचित हुए। 2017 में वह पुरकाजी से भाजपा के प्रमोद ऊटवाल से चुनाव हार गए थे। विधानसभा चुनाव 2022 से पहले अनिल कुमार सपा में शामिल हुए थे। गठबंधन में पुरकाजी सुरक्षित सीट रालोद के हिस्से में चली गई। उन्होंने रालोद के टिकट पर चुनाव जीता।
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आखिरकार राजभर को होली से पहले मिल गया राजपाट
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को आखिरकार होली से पहले राजपाट मिल ही गया है। बकौल राजभर 2019 में होली पर उन्होंने मंत्री पद छोड़ा था। तब से उन्होंने अभी तक होली नहीं मनाई है। अब होली से पहले फिर राजपाट मिलने पर चार साल बाद इस बार होली मनाएंगे।
ओमप्रकाश राजभर प्रदेश में राजभर सहित अन्य अति पिछड़ी जातियों को साथ लेकर 2002 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की स्थापना की। 2017 में सुभासपा ने भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा। सुभासपा ने तीन सीटें जीती थीं।
ओमप्रकाश राजभर को पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बनाया गया था। लेकिन, योगी सरकार से मनमुटाव के चलते ओमप्रकाश राजभर मार्च 2019 में सरकार से अलग गए थे। लोकसभा चुनाव 2019 में सुभासपा ने अपने दम पर चुनाव लड़ा।
विधानसभा चुनाव 2022 से पहले सुभापसा ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया। सुभापसा और सपा के गठबंधन के कारण भाजपा को पूर्वांचल में करीब 10-15 सीटों पर नुकसान हुआ। वहीं सुभासपा को छह सीटें मिली। लेकिन सपा के साथ भी उनका गठबंधन ज्यादा दिन नहीं चला।
जुलाई 2023 में ओमप्रकाश राजभर सपा से गठबंधन तोड़कर फिर एनडीए में शामिल हो गए। तब से ओमप्रकाश को मंत्री बनने का इंतजार था। गत दिनों उन्होंने एक बयान दिया था कि यदि राजपाट नहीं मिला तो इस बार भी होली नहीं मनाऊंगा। लेकिन अब होली से पहले उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया है।
सुनील शर्मा को सर्वाधिक वोटों से जीतने का मिला इनाम
गाजियाबाद के साहिबाबाद से भाजपा विधायक सुनील शर्मा को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। शर्मा को 2017 और 2022 में लगातार दो बार सर्वाधिक मतों से जीत का इनाम मिला है। इसके साथ ही पार्टी ने पश्चिमी यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने और लोकसभा चुनाव में सामाजिक समीकरण बैठाने की भी कोशिश की है।
पश्चिम यूपी में ज्यादातर लोकसभा सीटों पर ब्राह्मणों की अच्छी संख्या है। लेकिन योगी मंत्रिमंडल में पश्चिम क्षेत्र से कोई ब्राह्मण मंत्री नहीं था। लोकसभा चुनाव में ब्राह्मण समाज को साधने के लिए पार्टी ने सुनील शर्मा को मंत्री बनाया है।
सूत्रों के मुताबिक गाजियाबाद से भाजपा के एक दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री चुनाव लड़ सकते हैं। उनके लिए सामाजिक समीकरण बैठाने के लिए भी सुनील की ताजपोशी की गई है। 2017 में सुनील शर्मा 1,50,565 मतों से जीते थे, 2022 में वह 2,14,845 मतों से जीते। उन्हें मंत्री बनाए जाने में सबसे बड़ी जीत भी आधार बनी है। 62 वर्षीय सुनील शर्मा पेशे से वकील हैं।