पहले टरकाते रहे अफसर, अब पुचकार रहे
डीएल एजेंसियों की मनमानी, भ्रष्टाचार व लूट के मामले में पिछले करीब छह महीने से प्राइवेटकर्मी परेशान हैं। वे परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन सहित अन्य अफसरों से मिलने के लिए मुख्यालय भी गए, पर उन्हें टरका दिया गया।
अफसरों ने एजेंसियों के खिलाफ इंचभर कार्रवाई तो दूर, सुनवाई तक नहीं की, लेकिन सीएम के नाराज होते ही अफसर एक्टिव हो गए। उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए पीड़ितों से बातचीत की। जो अफसर पहले उन्हें टरका रहे थे, वे सोमवार को कर्मियों को पुचकारते नजर आए।
अफसरों की शह पर डीएल एजेंसियों ने की लूट
डीएल एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने अफसरों की शह पर प्रदेशभर में कर्मचारियों से भर्ती के नाम पर तीन से चार लाख रुपये वसूले। कर्मचारियों के पैसों से ही कम्प्यूटर व यूपीएस लगवा गए। कर्मचारियों से उनकी सैलरी के पैसे भी एडवांस में वसूले गए, ऐसा करने से इनकार करने वाले 40 कर्मियों को निकाल दिया गया। सूत्र बताते हैं कि एजेंसियों के इस लूटपाट में अफसरों को भी हिस्सा दिया गया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की शिकायत भी अफसरों ने कर दी दरकिनार
डीएल एजेंसियों की लूट के खिलाफ पूर्व परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने जांच के आदेश भी दिए थे। 25 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखे गए। जांच रिपोर्ट कहां हैं, किसी को नहीं पता। पूरी जांच ठंडे बस्ते में चली गई।
इतना ही नहीं परिवहन विभाग को 30 से अधिक शिकायतें दी गईं, लेकिन एजेंसी से सांठगांठ की वजह से अफसरों ने एक मामले में भी जांच नहीं करवाई। हद तो यह है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी जांच के लिए पत्र लिखा, पर मामला सिफर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई होगी
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया कि डीएल एजेंसियों से निकाले गए प्राइवेट कर्मियों से शिकायतें ली गई हैं। संबंधित जिलों में एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई, जिसकी रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई होगी।