भारतीय जनता पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन की कसौटी भी इस बार सवालों में है। वजह, पार्टी के न तो नए प्रत्याशी उम्मीद के हिसाब से नतीजे दे पाए और न ही वे पुराने सांसद जिन पर एक बार फिर भरोसा जताया गया था।
दोनों का ही नए प्रत्याशियों की सफलता दर 50 फीसदी तक सीमित रही तो पुराने आजमाए चेहरो की सफलता दर 41.50 फीसदी पर अटक गई। भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा की 80 सीटों में 75 पर चुनाव लड़ा। बाकी पांच सीटें सहयोगी दलों को दी गई थी।
पार्टी ने चुनाव में जिन 22 नए चेहरों को टिकट दिया था, उनमें से केवल 11 ही जीत सके। बाकी प्रत्याशियों को शिकस्त का सामना करना पड़ा। वहीं जिन पुराने 53 नेताओं पर भाजपा ने भरोसा जताया था, उनमें से 22 को ही चुनाव में फतह मिल सकी।
विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा के नए व पुराने प्रत्याशियों की हार-जीत की दर बताती है कि प्रत्याशी चयन की कसौटी भी सही नहीं थी। ये नतीजे ये भी बताते हैं कि कई स्तर पर कराए गए सर्वे, पार्टी स्तर से लिए जाने वाले फीडबैक को भी कहीं न कहीं नजरंदाज किया गया। भाजपा के अपेक्षित नतीजे आने के पीछे यह भी बड़ा कारण है।
नए प्रत्याशियों में ये 11 जीते
भाजपा के जिन 11 नए चेहरों ने जीत हासिल की है, उनमें पीलीभीत से जितिन प्रसाद, मेरठ से अरुण गोविल, गाजियाबाद से अतुल गर्ग, हाथरस से अनूप वाल्मीकि, बरेली से छत्रपाल सिंह, कानपुर से रमेश अवस्थी, बहराइच से आनंद कुमार गोंड, कैसरगंज से करण भूषण सिंह, फूलपुर से प्रवीण पटेल, भदोही से विनोद बिंद, देवरिया से शशांक मणि त्रिपाठी शामिल हैं।
वहीं हारने वालों में नगीना से ओमकुमार, फिरोजाबाद से विश्वदीप सिंह, मैनपुरी से जयवीर सिंह, बदायूं से दुर्विजय सिंह शाक्य, बाराबंकी से राजरानी रावत, इलाहाबाद से नीरज त्रिपाठी, अंबेडकरनगर से रितेश पांडेय, श्रावस्ती से साकेत मिश्रा, जौनपुर से कृपाशंकर सिंह, बलिया से नीरज शेखर, गाजीपुर से पारसनाथ राय शामिल है
इन 31 पुराने चेहरों के हिस्से आई हार
सहारनपुर से राघव लखनपाल, कैराना से प्रदीप कुमार, मुजफ्फरनगर से संजीव बालियान, मुरादाबाद से कुंवर सर्वेश सिंह, संभल से परमेश्वर सैनी, रामपुर से घनश्याम लोधी, एटा से राजवीर सिंह, आंवला से धर्मेंद्र कश्यप, खीरी से अजय मिश्रा टेनी, धौरहरा से रेखा वर्मा के हिस्से हार आई।
सीतापुर से राजेश वर्मा, इटावा से रामशंकर कठेरिया, कन्नौज से सुब्रत पाठक, मोहनलालगंज से कौशल किशोर अपना प्रभाव नहीं दिखा सके।
रायबरेली से दिनेश प्रताप सिंह, अमेठी से स्मृति ईरानी, जालौन से बीपी सिंह वर्मा, हमीरपुर से पुष्पेंद्र चंदेल, बांदा से आरके सिंह पटेल, कौशांबी से विनोद सोनकर, फैजाबाद से लल्लू सिंह, सुल्तानपुर से मेनका गांधी, फतेहपुर से साध्वी निरंजन ज्योति, प्रतापगढ़ से संगम लाल गुप्ता को भी हार का सामना करना पड़ा।
बस्ती से हरीश द्विवेदी, लालगंज से नीलम सोनकर, आजमगढ़ से दिनेश यादव निरहुआ, मछलीशहर से बीपी सरोज, संतकबीरनगर से प्रवीण निषाद, सलेमपुर से रवींद्र कुशवाहा, चंदौली से डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय भी चक्रव्यू से पार नहीं पा सके।