चाइनीज मांझे से हो रही हैं कई घटनाएं।
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चीनी मांझे के अवैध आयात और प्रदेश में बिक्री को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पीएमओ, राज्य सरकार समेत संबंधित विभागों से जवाब तलब किया। अदालत ने तीन सितंबर को इस मामले में दिए गए आदेश के पालन के लिए एक और मौका दिया। इस आदेश में अदालत ने अमर उजाला में 26 अगस्त को प्रकाशित खबर को रिकार्ड में लिया था।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने मोती लाल यादव की जनहित याचिका पर गुरुवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 जनवरी को नियत की है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर तीन सितंबर को आदेश पारित किया था। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने पीएमओ, राज्य सरकार समेत अन्य प्रतिवादी की प्रार्थना पर तीन सितंबर के आदेश पर आवश्यक कार्रवाई के लिए एक और मौका दिया।
लखनऊ पीठ की खंडपीठ ने तीन सितंबर को प्रदेश के सभी जिलों के डीएम और पुलिस अधीक्षकों से चीनी मांझे पर की गई कार्रवाई पर हलफनामा पेश करने का आदेश दिया था। साथ ही गृह विभाग और पर्यावरण विभाग उप्र से चीनी मांझे पर की गई कार्रवाई की प्रक्रिया के संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा था। अदालत ने भारत सरकार से इस संबंध में जानकारी मांगी थी कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में यह मामला लंबित है या नहीं।