चीन पहले स्थान पर
अध्ययन में चीन 64 रिट्रैक्टेड शोधपत्रों के साथ पहले स्थान पर रहा। भारत 22 शोधपत्रों के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद अमेरिका (12), ईरान (11), पाकिस्तान और ब्रिटेन (नौ-नौ) का स्थान रहा। यह आंकड़ा वैश्विक शोध में वैज्ञानिक ईमानदारी के संकट को दर्शाता है।
भारत में शोधपत्रों की वापसी और सुधार के सुझाव
अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत से कुल 887 शोधपत्र वापस लिए गए। यह चीन के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। वैश्विक शोध प्रकाशनों में भारत की हिस्सेदारी पांच फीसदी है, जबकि रिट्रैक्टेड शोधपत्रों में यह करीब 21 फीसदी है।
अध्ययनकर्ताओं का सुझाव है कि केवल नई नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं होगा। युवा अध्ययनकर्ताओं को वैज्ञानिक नैतिकता का बेहतर प्रशिक्षण देना और शोध मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ाना आवश्यक है।