उत्तर प्रदेश में इन दिनों स्मार्ट प्रीपेड मीटर की रफ्तार को लेकर बवाल मचा हुआ है। आरोप है कि यह मीटर तेज चलता है। इस बीच बिजली विभाग के पूर्व अधिकारियों ने ऐसा गणित साझा किया है, जिससे उपभोक्ता घर बैठे यह जान सकते हैं कि उनका मीटर सही चल रहा है या नहीं। बिजली महकमे के सेवानिवृत्त इंजीनियर ने अपनी सोसाइटी के लोगों को उपकरणों की खपत का घंटेवार ब्योरा जारी किया है।
आगरा के दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी रह चुके सुधीर कुमार वर्मा ने बताया कि घरों में सबसे ज्यादा बिजली 1.5 टन का श्री-स्टार एसी खाता है, जो प्रति घंटे करीब 2 यूनिट खर्च करता है। यदि एसी रोजाना 8 घंटे चले, तो अकेले महीने की 480 से 500 यूनिट खर्च होना स्वाभाविक है। वहीं, बल्ब, पंखे, कूलर, फ्रीज मिलकर करीब 120 यूनिट बिजली खाते हैं।
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वहीं, सरोजनीनगर स्थित विद्युत प्रशिक्षण संस्थान के एक्सईएन संजय शर्मा ने बताया कि डिप्लोमा इंजीनियरिंग में इलेक्ट्रिकल छात्र व छात्राओं को बिजली उपकरण में प्रति घंटे बिजली खपत के बारे में पढ़ाया जाता है। इाला आधार पर उपभोक्ता भी अपने प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर में जलने वाली बिजली की आसानी से गणना कर सकता है।
घरेलू बिजली सात रुपये प्रति यूनिट
स्मार्ट प्रीपेड मीटर में जलने वाली घरेलू बिजली का औसतन रेट सात रुपये यूनिट का है। यदि कोई उपभोक्ता प्रतिमाह 300 यूनिट बिजली खर्च कर रहा तो उसे 2100 रुपये का बिल चुकाना होगा। हालांकि, प्रीपेड उपभोक्ताओं को रिचार्ज करने पर दो फीसदी की छूट भी मिलती है।