पूछताछ में छांगुर ने लिया नीतू का भी नाम।
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अवैध धर्मांतरण के आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ में विदेशी संस्थाओं द्वारा फंडिंग होने से साफ इनकार कर दिया। उसने कबूला कि उसके खातों में आई अधिकांश रकम नवीन नवीन रोहरा ने भेजी थी। नवीन ने दुबई में जो कंपनियां बनाई थीं, उसके जरिये वह नीतू को भी रकम ट्रांसफर करता था। इस रकम से उसने नीतू और नवीन के साथ संपत्तियां खरीदी थीं। हालांकि नवीन के पास अचानक करोड़ों रुपये कहां से आए थे, इस बारे में वह जानकारी नहीं दे सका।
वहीं दूसरी ओर उसने सीजीएम कोर्ट के बाबू राजेश उपाध्याय से तहसील परिसर में मुलाकात होने की बात कही, जो उसकी संपत्तियों की रजिस्ट्री में मदद करता था। उसने कहा कि वह नवीन के साथ पुणे की संपत्ति को खरीदने वाला था। बुधवार को पूछताछ के दौरान वह बार-बार खुद को निर्दोष बताता रहा और अवैध धर्मांतरण में संलिप्त होने से इंकार करता रहा।
बता दें कि ईडी की पूछताछ में सामने आया है कि नवीन और नीतू ही संपत्तियों को खरीदने के लिए पैसों का बंदोबस्त करते थे। दोनों के बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खातों में करीब 63 करोड़ रुपये आए थे, जिसमें से 2.55 करोड़ रुपये यूएई से भेजे गए थे। इसमें से करीब 4 करोड़ रुपये नवीन, नीतू और छांगुर के नाम से संपत्तियां खरीदने के लिए अलग-अलग लोगों को दिए गए थे। हालांकि अभी तक ईडी यह पता नहीं लगा सका है कि इसमें से अवैध धर्मांतरण के लिए कितनी रकम दी गई है। अधिकारियों को शक है कि छांगुर के पास यूपीआई के जरिए भी खासी रकम आई थी, जिसे वह अवैध धर्मांतरण में इस्तेमाल कर रहा था।
मददगारों की तलाश में मुंबई पहुंची एटीएस
वहीं दूसरी ओर एटीएस की एक टीम मंगलवार को मुंबई गई है, जो अवैध धर्मांतरण में छांगुर की मदद करने वाले चार लोगों को तलाश रही है। फिलहाल एटीएस को इस बाबत कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। चारों युवक छांगुर के मुंबई में रहने के दौरान संपर्क में आए थे। सूत्रों की मानें तो इसकी जानकारी एटीएस को रिमांड के दौरान छांगुर ने दी थी।