41 डॉक्टरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तहरीर देने के बाद पिछले 15 साल में आयुर्वेदिक व यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में पंजीयन कराने वाले करीब 14 हजार से अधिक डॉक्टरोंं की डिग्रियों की नए सिरे से स्क्रूटनी शुरू की गई है। वर्ष 2010 के बाद पंजीयन कराने वाले सभी डॉक्टरों की मार्कशीट, प्रमाण पत्र, इंटर्नशिप प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच में जिन डॉक्टरों के दस्तावेज में गड़बड़ी मिलेगी, उनके खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
15 लाख में पंजीयन का आरोप
मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में बोर्ड के उपाध्यक्ष डा. शैलेश कुमार राय ने आरोप लगाया है कि फर्जी डिग्री वाले डॉक्टरों के पंजीयन में 15-15 लाख की रकम ली गई है। यही वजह है कि बोर्ड के अधिकारियों ने पूरे मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। यह भी आरोप है कि एनआईए जयपुर के नाम से फर्जी डिग्री लगाकर 10 लोगों ने पंजीयन कराया है, जबकि मध्य प्रदेश के मंदसौर इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा की डिग्री के जरिये पांच लोगों ने पंजीयन कराया है। ये सभी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। इन सभी का पंजीयन वर्ष 2020 से 2023 के बीच हुआ है।
आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बती चिकित्सा पद्धति बोर्ड के नियंत्रक मदन सिंह गर्ब्याल का कहना है कि पिछले 15 साल में पंजीयन कराने वाले सभी डॉक्टरों के दस्तावेजों की नए सिरे से जांच शुरू कराई गई है। दोषियों का पंजीयन रद्द कर रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। फर्जी डिग्री वाले 41 डॅाक्टरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। मामले में लापरवाही बरतने वाले बोर्ड के अधिकारियों एवं कर्मचारियों और संबंधित क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।