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यूपी: प्रदेश में 10 मई तक हो सकता है कैबिनेट विस्तार, उम्रदराज मंत्रियों के सिर पर लटकी तलवार; इन्हें मौका?

Wed, 06 May 2026 06:17 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Yogi Cabinet: यूपी में लंबे समय से टल रहा कैबिनेट विस्तार 10 से 15 मई के बीच हो सकता है। पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण के बाद यह प्रक्रिया होने की संभावना है। 
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दिल्ली से चर्चा के बाद तय हुए हैं नाम। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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 पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज करने के बाद भाजपा के रणनीतिकारों का अब पूरा फोकस यूपी पर हो गया है। 2027 में होने वाले चुनावी तैयारी में पार्टी सबसे बहुप्रतीक्षित प्रदेश मंत्रिमंडल के विस्तार और प्रदेश संगठन में बदलाव के काम को पूरा किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में सरकार के गठन के बाद यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार को अमली जामा पहनाया जाएगा। संभावना है कि 10 मई के पहले मंत्रिमंडल का विस्तार और इसके बाद यानि 15 मई तक संगठन के नए प्रदेश और क्षेत्रीय पदाधिकारियों की सूची जारी हो सकती है। खास बात यह होगी कि मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ उम्रदराज मंत्रियों के स्थान पर नए व युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है।

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वहीं, पार्टी के कुछ भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि 10 से 15 मई के बीच भाजपा ने दोनों लंबित काम मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव को पूरा करने का फैसला किया है। इस मुद्दे पर अब लखनऊ से लेकर दिल्ली तक में चिंतन-मथन का काम पूरा हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल का विस्तार आगामी चुनाव के समीकरण के लिहाज से किया जाएगा। जिसमें सभी जातियों की समीकरण साधने की कोशिश होगी। दरअसल सूत्रों का कहना है कि सात मई को बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाले नए मंत्रिमंडल के विस्तार के अलावा 8 मई को असम और 9 मई को पश्चिम बंगाल में सरकार के गठन को लेकर पार्टी नेतृत्व व्यस्त रहेगा। इसलिए माना जा रहा है कि इसके बाद यूपी में विस्तार और संगठन के अधूरे काम को पूरा किया जाएगा।

बता दें कि मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव को लेकर पूरे अप्रैल भर लखनऊ और दिल्ली में बैठकों का दौर चलता रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा दिल्ली में भी बड़े नेताओं और पार्टी के निर्णायक नेताओं के बीच कई बड़ी बैठके हुईं। 12 और 13 अप्रैल को राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने खुद लखनऊ में रहकर पूर्व प्रदेश अध्यक्षों एवं मंत्रियों से फीडबैक लिया थी।

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एक दर्जन से अधिक नाम पर विचार

सूत्रों के मुताबिक अब तक की बैठकों में लिए गए निर्णयों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार में खाली पदों को भरने के साथ ही कुछ पुराने मंत्रियों को भी उनके परफारमेंस के आधार पर बदला जा सकता है। वहीं, कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी देने पर भी चर्चा हुई है। जबकि उम्रदराज हो चुके दो-तीन मंत्रियों के स्थान पर नए युवा चेहरों को मौका मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक एक दर्जन से अधिक नाम पर चर्चा हुई है।, लेकिन अभी तक किसी चेहरे को फाइनल नहीं किया गया है, लेकिन जातिगत समीकरण को साधने के लिए ओबीसी और दलित समाज को अधिक तरजीह दी जाएगी। इनके अलावा अगड़ी जातियों में ब्राम्हण व क्षत्रिय समाज से एक-दो लोगों को मौका मिल जाएगा।
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सहयोगी दलों को मिलेगी भागीदारी

सूत्रों के मुताबिक बैठकों में तय किया गया है कि विस्तार में सहयोगी दलों अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी के एक-एक विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। चेहरा तय संबंधित दल के मुखिया करेंगे।

महिलाओं को भी मौका
इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ महिलाओं को भी मिल सकता है। इसमें दलित और ओबीसी समाज की महिला विधायकों को मौका मिल सकता है। दोनों समुदायों की तीन-चार महिला विधायकों के नाम गंभीरता से विचार किया गया है। वहीं, मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया जाएगा और कुछ राज्यमंत्रियों को पदोन्नति भी मिल सकती है।
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