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UP Cabinet : छह डेयरी प्लांट लीज पर देने का फैसला,  गोरखपुर, कानपुर, नोएडा प्लांट 10 वर्ष की लीज पर दिए जाएंगे

Wed, 23 Aug 2023 05:37 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

योगी सरकार के इस फैसले से प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) का सुदृढ़ीकरण होने के साथ डेयरी फेडरेशन, अर्द्धसरकारी दुग्ध प्रसंस्करण एवं विपणन संस्थान और दुग्ध संघों को बढ़ावा मिलेगा।
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डेयरी प्लांट का किया निरीक्षण (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट ने प्रदेश के छह डेयरी प्लांट को 10 वर्ष की लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। गोरखपुर, कानपुर, नोएडा, प्रयागराज, आजमगढ़ और मुरादाबाद के डेयरी प्लांट लीज पर देने से पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य मिलेगा। इस फैसले से प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) का सुदृढ़ीकरण होने के साथ डेयरी फेडरेशन, अर्द्धसरकारी दुग्ध प्रसंस्करण एवं विपणन संस्थान और दुग्ध संघों को बढ़ावा मिलेगा।

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उल्लेखनीय है कि इन डेयरी प्लांट का स्वामित्व पीसीडीएफ और दुग्ध संघों का ही रहेगा। लीज फर्म को केवल इनके प्रबंधन और संचालन के लिए सौंपा जाएगा। वह प्लांट की मूल संरचना के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगी। इन प्लांट को लीज पर लेने के लिए बनासकांठा डेयरी गुजरात, साबर डेयरी गुजरात, मदर डेयरी नई दिल्ली और काम्फेड सुधा डेयरी बिहार ने रुचि दर्शाई है। डेयरी प्लांट को जहां है-जैसा है, के आधार पर दिया जाएगा। लीज फर्मों को सबसे पहले क्षेत्र सहकारी दुग्ध समितियों से दूध लेना होगा। दुग्ध संघाें को भंग नहीं किया जा सकेगा। लीज पर देने से पहले विभाग की ओर से इनके कर्ज को शून्य किया जाएगा। डेयरी में काम करने वाले पीसीडीएफ के कर्मचारियों को अन्य दुग्ध संघों एवं पीसीडीएफ इकाइयों में समायोजित किया जाएगा। आरएफपी प्रकाशित किए जाने की तिथि से 84 दिनों के अंदर लीज प्रक्रिया को पूरा कर प्लांट का संचालन करना होगा। वहीं लीज फर्म द्वारा एक वर्ष से कम समय में प्लांट का संचालन समाप्त किया जाएगा, तो सिक्योरिटी मनी को जब्त कर ली जाएगी।

पहले तीन सालों में समान लीज रेंट
बता दें कि वर्तमान में गोरखपुर प्लांट का वार्षिक टर्नओवर 110 करोड़, कानपुर का 325 करोड़, नोएडा का 438 करोड़, प्रयागराज का 65 करोड़, आजमगढ़ का 11 करोड़ और मुरादाबाद का 110 करोड़ है। ऐसे में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) के अनुसार आवेदन करने वाले फर्मों की न्यूनतम मिल्क हैंडलिंग कैपेसिटी, लीज पर दिये जाने वाले प्लांट्स की क्षमता का 50 प्रतिशत होना अनिवार्य है। वहीं प्रथम तीन वर्षों में वार्षिक लीज रेंट समान रहेगा, जबकि चौथे वर्ष से लीज रेंट में सामान्य से 5.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। मालूम हो कि वर्तमान में गोरखपुर का वार्षिक लीज रेंट 4.38 करोड़, कानपुर का 13.56 करोड़, नोएडा का 17.89 करोड़, प्रयागराज का 2.63 करोड़, आजमगढ़ का 44 लाख और मुरादाबाद का 4.38 करोड़ है। ऐसे में विभाग को कुल 43.28 करोड़ की धनराशि रिजर्व वार्षिक लीज रेंट के रूप में प्राप्त होगी।
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आरएफपी, आरएफक्यू का मसौदे को मंजूरी
कैबिनेट ने प्रदेश के छह डेयरी प्लांट को लीज पर देने के साथ आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) और आरएफक्यू (रिक्वेस्ट फॉर कोटेशन) का मसौदा पर मुहर लगा दी है। इससे इन डेयरी प्लांट को पट्टे पर देने की कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सकेगी।

इसके अलावा इन डेयरी को पट्टे पर देने से पहले उनके समस्त देयों का भुगतान अनुपूरक बजट से करने का प्रस्ताव भी मंजूर किया है।इसमें 171.94 करोड़ रुपये ब्याज रहित ऋण के रूप में जबकि 4.05 करोड़ रुपये गोरखपुर डेयरी प्लांट के दुग्ध मूल्य भुगतान के लिए मिलेगा। इन सभी छह डेयरी प्लांट को दुग्ध सहकारिता, दुग्ध उत्पादक कंपनियों अथवा एनडीडीबी की सब्सिडियरी मदर डेयरी के माध्यम से संचालित किया जाना है।

डेयरी प्लांट की क्षमता
प्लांट             लीटर प्रतिदिन
गोरखपुर             1.00 लाख
कानपुर नगर 4.0 लाख
नोएडा             4.00 लाख
प्रयागराज             60 हजार
आजमगढ़            10 हजार
मुरादाबाद            1.00 लाख
 

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निर्माण कार्यों में आएगी तेजी, भवन गिराने व मलबा बेचने का दायरा बढ़ा

निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए विभागों के वित्तीय अधिकारों को बढ़ा दिया गया है। विभागाध्यक्ष के वित्तीय अधिकार दोगुना और प्रशासकीय विभाग के अधिकार पांच गुना तक बढ़ा दिए गए हैं। एक करोड़ रुपये से ऊपर के ऐसे मामलों में मंत्रिमंडल का अनुमोदन प्राप्त करना होगा। शासकीय कामों को कम समय और तेज गति से करने के लिए विभिन्न विभागों के वित्तीय अधिकारों को बढ़ा दिया गया है। अभी तक भवन को गिराने व मलबा बेचने की विभागाध्यक्ष की सीमा केवल पांच लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दिया गया है। प्रशासकीय विभाग की सीमा पहले दस लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। 50 लाख रुपये से अधिक के लिए मुख्य सचिव की अनुमति जरूरी थी। मुख्य सचिव एक करोड़ रुपये तक के मामलों में निर्णय खुद ले सकेंगे। इससे अधिक की कीमत के लिए मंत्रिमंडल की अनुमति जरूरी होगी।

चंद्रशेखर विश्वविद्यालय को दी जाएगी कृषि विभाग की भूमि
कानपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को दी गई चंद्रखेशर आजाद कृषि एवं प्रद्यौगिकी विश्वविद्यालय की जमीन की भरपाई कृषि विभाग की जमीन देकर की जाएगी । कृषि विभाग, विश्वविद्यालय को कानपुर सदर तहसील के अन्तर्गत कानपुर-हमीरपुर मार्ग पर स्थित 15.69 हेक्टेयर भूमि हस्तानांतरित करेगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। बता दें कि कानपुर में मेट्रो रेल परियोजना के तहत उप केन्द्र बनाने के लिए चंद्रखेशर आजाद कृषि एवं प्रद्यौगिकी विश्वविद्यालय के फसल शोध क्षेत्र के लिए आरक्षित 3000 वर्ग मीटर समेत कुल 14.06 हेक्टेयर भूमि कानपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को हस्तानांतरित किया गया था । इसके एवज में कृषि विभाग की विधनू क्षेत्र की भूमि को विश्वविद्यालय को देने का निर्णय लिया गया है।

शीरा अधिनियम में किया संशोधन
कैबिनेट ने प्रदेश की चीनी मिलों द्वारा शीरे की बिक्री और आपूर्ति पर लाइसेंस शुल्क लेने के लिए उप्र शीरा नियंत्रण अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। शीरा अधिनियम की धारा 22 की उपधारा (1) में नियम बनाने के अधिकार को सुगम और सरलीकरण किए जाने की दृष्टि से संशोधन किया गया है। संशोधन के जरिए फरवरी माह में जारी गजट में इस्तेमाल एक शब्द का सरलीकरण किया गया है।
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