राहुल गांधी, अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
जातीय जनगणना लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनकर उभरी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हर सभा में इस मुद्दे को उठाया। सपा भी जातीय जनगणना की बात कहती रही लेकिन इन चुनावों में जातीय जनगणना की बात सिरे से गायब दिखी। जाति जनगणना के साथ-साथ संविधान बचाने का मुद्दा भी इन चुनावों में नहीं दिखा।
नहीं चला पीडीए का दांव
अभी तक के रुझानों में सपा जिन दो सीटों पर आगे चल रही है उनमें एक सीट अखिलेश यादव के द्वारा छोड़ी गई करहल है और दूसरी मुस्लिम बाहुल्य सीट सीसमाऊ है। इन दोनों सीटों में सपा के आगे चलने के अलग समीकरण हैं। इन दो सीटों की बात को छोड़ दें तो बाकी सीटों पर सपा का पीडीए फॉर्मूला साथ देता हुआ नहीं दिखा। यादव के अलावा बाकी ओबीसी जातियां उस तरह से सपा के पाले में नहीं आईं जैसा लोकसभा के चुनावों में हुआ था।
इन चुनावों में कांग्रेस ने एक रणनीतिक दूरी बनाई। कांग्रेस खुद को दूर रखकर यह देखना भी चाह रही थी कि बिना गठबंधन के सपा कैसा परफॉर्म करती है। चुनाव परिणामों ने एक बात साफ कर दी है फिलहाल सपा और कांग्रेस दोनों को एक दूसरे की जरूरत है।