शिवपाल यादव हैं पूरी तरह सक्रिय।
कटेहरी से यहां के सांसद लालजी वर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर है। सपा से यहां के प्रभारी बनाए गए शिवपाल सिंह यादव और भाजपा की ओर से उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के सियासी कद की भी यहां परीक्षा है। मझवां में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और उनके पति आशीष पटेल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। मीरापुर सीट से रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर है। कुर्मी बहुल फूलपुर में असली परीक्षा एमएसएमई मंत्री राकेश सचान और सपा महासचिव इंद्रजीत सरोज की है। यह सीट उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई है। कुंदरकी की कमान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह और मंत्री जेपीएस राठौर को सौंपी गई है तो सपा से रामअवतार सैनी को अपनी ताकत दिखाने का मौका मिला है। सीसामऊ के परिणाम का असर भाजपा के दिग्गज मंत्री सुरेश खन्ना पर पड़ना तय है। कुछ ऐसी ही स्थित गाजियाबाद और खैर सीट की भी है।
अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव।
- फोटो : अमर उजाला
राजनीतिक विश्लेषक व वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल कहते हैं कि उपचुनाव सीधे तौर पर सपा-भाजपा के बीच है। यह चुनाव सीएम योगी आदित्यनाथ और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। चुनाव जीतने की रणनीति भी प्रदेश स्तर पर तय की जा रही है। भाजपा सभी सीटों पर दावा कर रही है, लेकिन पांच से एक भी सीट अधिक हुई तो यह उसकी उपलब्धि मानी जाएगी। सपा उसकी इस उपलब्धि को रोककर जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि लोकसभा की तरह ही जनता के बीच उसका जलवा कायम है। इस चुनाव परिणाम के आधार पर स्थानीय क्षत्रपों का भविष्य भी तय होगा।